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भारत में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई: बांग्लादेश को भेजी गई 2,680 संदिग्ध नागरिकों की सूची

भारत सरकार ने अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश को 2,680 संदिग्ध नागरिकों की सूची भेजी है, जिससे उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा सके। पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ गई है, और कई लोग स्वेच्छा से अपने देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। जानें इस प्रक्रिया और इसके पीछे के कारणों के बारे में विस्तार से।
 

केंद्र सरकार का सख्त रुख


नई दिल्ली: भारत में अवैध रूप से निवास कर रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जो विदेशी नागरिक गैर-कानूनी तरीके से देश में प्रवेश कर चुके हैं, उनके मामलों का निपटारा कानून के अनुसार किया जाएगा। इस दिशा में, भारत ने बांग्लादेश को 2,680 संदिग्ध नागरिकों की सूची भेजी है ताकि उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा सके।


सरकार का मानना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन नागरिकों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। इस बीच, पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों के बीच चिंता बढ़ गई है, और कई लोग स्वेच्छा से बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं।


डिपोर्टेशन प्रक्रिया पर विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े 2,680 मामलों को सत्यापन के लिए बांग्लादेशी अधिकारियों के समक्ष रखा गया है।


उन्होंने कहा, "जैसे ही इन नागरिकों की राष्ट्रीयता का सत्यापन पूरा होगा, हम उन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।" प्रवक्ता ने यह भी बताया कि कई मामलों में यह प्रक्रिया पिछले पांच वर्षों से लंबित है। भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश इस मामले में जल्द कार्रवाई करेगा, जिससे द्विपक्षीय व्यवस्था के तहत इन नागरिकों की वापसी संभव हो सके।


नई नीति के बाद अवैध प्रवासियों में चिंता

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी प्रवासी पहुंचे हैं। इनमें से कई लोग वर्षों से भारत में रह रहे थे, लेकिन अब वे अपने देश लौटने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं।


वापसी के पीछे का कारण

राज्य में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार द्वारा लागू की गई 'पहचानो, हटाओ और डिपोर्ट करो' नीति के कारण अवैध प्रवासियों के बीच डर का माहौल बन गया है। बिना वैध दस्तावेजों के रह रहे लोगों को कानूनी कार्रवाई, जेल और जुर्माने का डर सता रहा है।


रोजगार की तलाश में भारत आया युवक

वापस लौटने वाले एक युवक ने बताया कि वह रोजगार की तलाश में लगभग एक वर्ष पहले बांग्लादेश से भारत आया था। अब बदलते हालात के कारण उसने अपने देश लौटने का निर्णय लिया है।


अब्दुल की कहानी

पश्चिम बंगाल में 2017 से रह रहे अब्दुल ने बताया कि उसके पास कोई भारतीय दस्तावेज नहीं है। उसने कहा, "अब 2026 है और मुझे यहाँ 9 साल हो गए हैं। नई नीति के तहत बिना कागजात वालों को जेल हो सकती है और हम जुर्माना नहीं भर सकते।" अब्दुल ने बताया कि वह बारासात में रिक्शा चलाकर जीवनयापन करता था, लेकिन अब वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है।


सुमैया खातून की आपबीती

सुमैया खातून अपनी दो वर्षीय बेटी के साथ बांग्लादेश लौट रही है। उसने बताया कि दो वर्ष पहले फेसबुक के माध्यम से उसकी पहचान एक भारतीय युवक से हुई थी। इसके बाद उसने अपने परिवार को बिना बताए एक दलाल को 15,000 रुपये देकर अवैध रूप से सीमा पार की और भारत पहुंची।


सुमैया ने कहा कि उसने मध्यमग्राम के एक मंदिर में शादी की थी, लेकिन बाद में उसके पति ने उसे छोड़ दिया। उसके अनुसार पति ने कहा, "तुम बांग्लादेशी हो, वापस जाओ।" भारतीय दस्तावेज बनवाने के प्रयास भी सफल नहीं हुए, जिसके बाद उसने अपने मायके लौटने का निर्णय लिया।


प्रशासन की कार्रवाई

केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पश्चिम बंगाल प्रशासन ने भी कार्रवाई तेज कर दी है। 23 मई को राज्य के गृह विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं।


इन निर्देशों के तहत पकड़े गए विदेशी नागरिकों को रखने के लिए जिलों में 'होल्डिंग सेंटर' स्थापित करने को कहा गया है। साथ ही, अवैध रूप से देश में रह रहे विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से बांग्लादेशी और रोहिंग्या मूल के लोगों तथा सजा पूरी कर चुके विदेशी कैदियों को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।