भारत में बच्चों की सुरक्षा को लेकर मेटा का बड़ा कदम
मेटा की नई पहल
नई दिल्ली: बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार की सख्त नीतियों के बीच, मेटा, जो फेसबुक की मूल कंपनी है, ने बाल यौन शोषण से संबंधित मामलों की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत में कार्यरत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बच्चों की सुरक्षा एक प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इसे किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार की सक्रियता
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, हानिकारक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सरकार लगातार सोशल मीडिया कंपनियों के साथ संपर्क में है। बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए मेटा अब बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट उपलब्ध कराएगा। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए और भी कदम उठाने की आवश्यकता है।
अन्य प्लेटफार्मों के साथ बातचीत
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के साथ भी बातचीत कर रही है ताकि बच्चों से संबंधित हानिकारक सामग्री की पहचान कर उसे तुरंत हटाया जा सके। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि प्लेटफार्मों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाए, तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
NCPCR की कार्रवाई
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब केंद्र सरकार डिजिटल प्लेटफार्मों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने 9 सितंबर को मेटा इंडिया के प्रतिनिधियों को बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से संबंधित विज्ञापनों की जांच के लिए बुलाया था। आयोग ने एक मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया था, जिसमें मेटा के प्लेटफार्मों पर बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री के विज्ञापनों का खुलासा हुआ था।
NHRC की जांच
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली पुलिस को उन आरोपों की गहन जांच करने का निर्देश दिया है, जिसमें कहा गया था कि मेटा के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के माध्यम से भारत में बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा दिया जा रहा है। NHRC ने यह भी जांचने को कहा है कि क्या मेटा और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के तहत अनिवार्य रिपोर्टिंग दायित्वों का पालन कर रहे हैं।