भारत में मदरसों के पंजीकरण और मान्यता की प्रक्रिया
मदरसे का पंजीकरण: एक आवश्यक प्रक्रिया
भारत में मदरसे को संचालित करने के लिए सबसे पहले उसे कानूनी रूप से पंजीकृत कराना आवश्यक है। यह पंजीकरण सोसाइटी, ट्रस्ट या सेक्शन 8 कंपनी के रूप में किया जा सकता है।
बिना पंजीकरण के, संस्थाओं के लिए कानूनी रूप से कार्य करना कठिन हो जाता है। इसके अलावा, बैंक खाता खोलने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने में भी समस्याएं आती हैं।
पंजीकरण और मान्यता में अंतर
मदरसे के पंजीकरण और शैक्षणिक मान्यता को एक ही प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। पंजीकरण से संस्था को कानूनी पहचान मिलती है, जबकि मान्यता का संबंध शिक्षा, पाठ्यक्रम और परीक्षाओं से होता है।
कई राज्यों में मदरसा शिक्षा बोर्ड या संबंधित सरकारी संस्थाएं मान्यता प्रदान करती हैं। उत्तर प्रदेश में यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2004 के तहत संचालित होती है।
बिना मान्यता वाले मदरसों की स्थिति
जनवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने मदरसों के संबंध में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया। अदालत ने कहा कि केवल शैक्षणिक मान्यता के अभाव में किसी मदरसे को बंद नहीं किया जा सकता।
हालांकि, बिना मान्यता वाले मदरसों को सरकारी अनुदान, बोर्ड की परीक्षाओं में भाग लेने की अनुमति या डिग्री की सरकारी मान्यता नहीं मिलती। उत्तर प्रदेश में 2017 से मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए पंजीकरण की व्यवस्था लागू है।
राज्यों में विभिन्न व्यवस्थाएं
मदरसों के लिए नियम हर राज्य में समान नहीं हैं। उत्तराखंड में पुराने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था की गई है।
पश्चिम बंगाल में भी अनिवार्य पंजीकरण और निरीक्षण से संबंधित प्रस्ताव सामने आया है।