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भारत में विदेशी साजिशों का मुद्दा: क्या है असली तैयारी?

हाल ही में, भारतीय नेताओं ने विदेशी साजिशों का मुद्दा उठाया है, जिसमें कहा गया है कि कुछ देश भारत की प्रगति को रोकने की कोशिश कर रहे हैं। इस लेख में, हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि क्या भारत इन साजिशों का सामना करने के लिए तैयार है। क्या सरकार को पता है कि कौन सी संस्थाएं या व्यक्ति भारत के खिलाफ साजिश कर रहे हैं? क्या मोदी सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम उठाए हैं? जानें इस लेख में।
 

विदेशी साजिशों का आरोप


हाल ही में, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने विदेशी ताकतों द्वारा भारत के खिलाफ साजिशों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ देशों को भारत की प्रगति पसंद नहीं आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विजयादशमी के अवसर पर इसी बात को दोहराया। इसके बाद से कई नेता और मंत्री इस विषय पर बयान दे रहे हैं। यह चर्चा तब शुरू हुई जब भाजपा और सरकार के हाथ से राजनीतिक नैरेटिव निकलने लगा।


जब यह महसूस हुआ कि किए गए वादे पूरे नहीं हो रहे हैं, तो विदेशी साजिशों का मुद्दा उठाया गया। यह आश्चर्यजनक है कि सभी विपक्षी पार्टियों को इस साजिश का हिस्सा बना दिया गया। जॉर्ज सोरोस का नाम भी इस संदर्भ में बार-बार लिया जा रहा है।


यदि विदेशी ताकतें भारत के खिलाफ साजिश कर रही हैं, तो भारत की तैयारी क्या है? अगर तैयारी सही है, तो चिंता की बात क्या है? यदि चिंता है, तो इसका मतलब है कि तैयारी अधूरी है।


भारत की स्थिति को देखते हुए, यह सवाल उठता है कि क्या सरकार को पता है कि कौन सी संस्थाएं या व्यक्ति भारत के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। यह एक अस्पष्ट टर्म है।


चीन की साजिशें स्पष्ट हैं। वह भारत की भूमि पर कब्जा कर रहा है और सीमा पर सैन्य बुनियादी ढांचा तैयार कर रहा है। हाल ही में, आईटीबीपी के प्रमुख ने भारत-चीन सैनिकों के बीच कई बार टकराव की बात की।


अमेरिका भी खुलकर साजिशें कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को कई बार समर्थन दिया है। क्या भारत का विपक्ष इन सब मामलों में शामिल है?


शी जिनपिंग और ट्रंप की साजिशें स्पष्ट हैं, लेकिन मोदीजी ने इनसे बचाने के लिए क्या कदम उठाए हैं? क्या भारत आर्थिक रूप से इतना मजबूत हो रहा है कि वह वैश्विक साजिशों का सामना कर सके?


भारत की अर्थव्यवस्था आज उपभोग आधारित है, और विकास दर का कोई खास मतलब नहीं है। प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि वे भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में लगे हैं, लेकिन वास्तविकता में कोई बदलाव नहीं हो रहा है।


इसलिए, साजिशें पहचानी गई हैं, लेकिन उनका मुकाबला कैसे किया जाएगा, यह स्पष्ट नहीं है।