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भारत-रूस संबंधों पर अमेरिका की नजर: क्या 100% टैरिफ होगा लागू?

भारत और रूस के बीच बढ़ती मित्रता ने अमेरिका को चिंतित कर दिया है। हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी और पुतिन की मुलाकात के बाद, अमेरिकी सांसदों ने 'रूसी प्रतिबंध विधेयक' में भारत का नाम शामिल करने की मांग की है। इस संशोधन के तहत भारत पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी की जा रही है। जानें इस विधेयक का क्या महत्व है और अमेरिका का यह कदम भारत के लिए क्या मायने रखता है।
 

भारत और रूस की मित्रता पर अमेरिकी चिंता


नई दिल्ली: भारत और रूस के बीच गहरे संबंध एक बार फिर अमेरिका के लिए चिंता का विषय बन गए हैं। हाल ही में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच की गर्मजोशी ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस मुलाकात के बाद अमेरिकी सांसदों ने संसद के उच्च सदन (सीनेट) द्वारा पारित 'रूसी प्रतिबंध विधेयक' में कड़े संशोधन की मांग की है। सांसदों का कहना है कि इस विधेयक में भारत का नाम शामिल किया जाए, जिससे रूस के साथ व्यापार करने पर भारत पर 100% तक भारी टैरिफ लगाया जा सके।


भारत पर टैरिफ लगाने की तैयारी

अमेरिका की नाराजगी का मुख्य कारण भारत का रूस से कच्चा तेल खरीदना है। वाशिंगटन का आरोप है कि यह व्यापार रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक सहायता प्रदान करता है। इसी आधार पर अमेरिका ने पिछले वर्ष भारत पर 50% टैरिफ लगाया था। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। अब अमेरिका भारत और चीन जैसे देशों पर दबाव बनाने के लिए नए टैरिफ का सहारा ले रहा है।


लिंडसे ओ ग्राहम रूस सैंक्शन बिल क्या है?

यह विधेयक अमेरिकी सीनेट में भारी बहुमत से पारित हो चुका है और अब निचले सदन, यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में मंजूरी का इंतजार कर रहा है। इसे 86-11 के बड़े अंतर से पास किया गया है और इसका नाम दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जो हमेशा भारत की नीतियों के आलोचक रहे हैं। इस बिल का मुख्य उद्देश्य रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करना और उसके गुप्त जहाजी बेड़े को समाप्त करना है, जिसके जरिए रूस वैश्विक पाबंदियों के बावजूद तेल का निर्यात कर रहा है। यदि यह संशोधन स्वीकार किया जाता है, तो अमेरिका में आने वाले सामान पर 100% आयात शुल्क लगाया जाएगा।


बिल में संशोधन की मांग

अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले इस बिल को लेकर राजनीति गरमा गई है। डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर ने बिल में संशोधन की मांग की है, जिसमें सामान्य भाषा के बजाय सीधे तौर पर भारत और चीन का नाम शामिल किया जाए। मूल मसौदे में केवल 'रूस से तेल खरीदने वाले देशों' का उल्लेख था, लेकिन नए प्रस्ताव में रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल आयात करने वाले शीर्ष 10 देशों को निशाना बनाने की योजना है। इस सूची में भारत और चीन के अलावा तुर्की, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य, यूएई, सिंगापुर, कजाखिस्तान और किर्गिस्तान के नाम शामिल किए जाने का सुझाव दिया गया है। यदि यह संशोधन स्वीकार होता है, तो इन देशों से अमेरिका में आने वाले सामान पर 100% आयात शुल्क लगाया जाएगा।