भारत-रूस संबंधों पर एस जयशंकर का स्पष्ट बयान, अमेरिका को दिया संदेश
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने भारत-रूस संबंधों की मजबूती का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेगा। जयशंकर ने कहा कि भारत सभी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है, चाहे वे विवादों में उलझे हों। उन्होंने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस बयान ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।
May 25, 2026, 12:51 IST
भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध
भारत और रूस के बीच की मित्रता किसी से छिपी नहीं है। यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका ने रूस पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, फिर भी भारत ने रूस से तेल खरीदना जारी रखा है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे के दौरान, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट रूप से भारत-रूस संबंधों की मजबूती का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध हमेशा विश्वास और रणनीतिक साझेदारी पर आधारित रहे हैं। जयशंकर ने यह भी बताया कि वर्तमान समय में दुनिया कई जटिल चुनौतियों और संघर्षों का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि भारत के सभी साझेदार देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, चाहे वे विवादों में क्यों न हों।
अमेरिका को स्पष्ट संदेश
जयशंकर का यह बयान अमेरिकी विदेश मंत्री के सामने चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिका ने लंबे समय से भारत और रूस के करीबी रिश्तों को लेकर चिंता जताई है, खासकर ट्रंप के कार्यकाल के बाद। अमेरिका ने भारत पर दबाव डाला है कि वह रूसी तेल का आयात न करे। लेकिन जयशंकर का हालिया बयान अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता नहीं करेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि भारत उन गिने-चुने देशों में से एक है जिनके अमेरिका और इजराइल के साथ अच्छे संबंध हैं।
भारत की बहुपरकारी नीति
जयशंकर ने कहा कि भारत अपने रिश्तों को जीरो सम गेम के रूप में नहीं देखता। इसका मतलब है कि एक देश के साथ संबंध मजबूत करने के लिए दूसरे देश से दूरी बनाना भारत की नीति नहीं है। भारत का उद्देश्य सभी देशों के साथ संतुलित तरीके से अपने हितों को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह अपने सभी रिश्तों को संतुलित तरीके से संभाले और अपने हितों की रक्षा करे।
पश्चिम एशिया में भारत की प्राथमिकताएं
जयशंकर ने पश्चिम एशिया पर भी बात की और कहा कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में भारतीय खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं, इसलिए वहां की सुरक्षा और भलाई भारत की प्राथमिकता है। इसके अलावा, भारत एक बड़ा ऊर्जा आयातक देश है और उसकी आवश्यकताएं पश्चिम एशिया से पूरी होती हैं। इसलिए, भारत चाहता है कि ऊर्जा की कीमतें नियंत्रित रहें और बाजार खुले रहें। उन्होंने समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर भी जोर दिया और कहा कि भारत सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार का समर्थन करता है।
भारत की स्वतंत्र विदेश नीति
कुल मिलाकर, विदेश मंत्री जयशंकर के बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। अमेरिका के साथ मजबूत संबंधों के बावजूद, भारत रूस और अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को भी समान महत्व देता है।