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भारत सरकार का नया कदम: 50 लाख पीएनजी कनेक्शन देने की योजना

भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से सबक लेते हुए 50 लाख नए पीएनजी कनेक्शन देने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई है। इस योजना का उद्देश्य शहरी विकास को प्रोत्साहित करना और ऊर्जा क्षेत्र में सुधार लाना है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने इस योजना के तहत पीएनजी नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया है, जिससे आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। जानें इस योजना के बारे में और क्या चुनौतियाँ सामने आ रही हैं।
 

पश्चिम एशिया में तनाव से सीख लेते हुए सरकार की नई रणनीति


पश्चिम एशिया में तनाव से सबक लेते हुए, सरकार ने भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की योजना बनाई है।


इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर लगातार हमलों के कारण पश्चिम एशिया में युद्ध का माहौल बना हुआ है। इस स्थिति का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है, खासकर एशियाई देशों में, जहां ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आ रही है। भारत सरकार ने जनता को आश्वस्त किया है कि देश में ऊर्जा का पर्याप्त भंडार है, लेकिन फिर भी घबराहट बनी हुई है। इस बीच, केंद्र सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेष योजना बनाई है।


शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा क्षेत्र को गति देने की योजना

केंद्र सरकार ने शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) नेटवर्क के विस्तार पर जोर दिया है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने हाल ही में एक समीक्षा बैठक में सिंगल-विंडो अप्रूवल की प्रक्रिया को संस्थागत बनाने, शहरी योजनाओं में पीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल करने, और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर जोर दिया।


उन्होंने कहा कि शहर आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र हैं और पीएनजी नेटवर्क के विस्तार को तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने 50 लाख नए पीएनजी कनेक्शन देने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।


पीएनजी को सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया

बैठक में विभिन्न हितधारकों ने शहरी भारत में पीएनजी नेटवर्क के विस्तार को तेज करने और आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा की। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पीएनजी को एलपीजी की तुलना में अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल बताया। हालांकि, कुछ प्रमुख चुनौतियों की पहचान भी की गई, जैसे नगर निकायों से अनुमति में देरी और सड़कों की बहाली पर अधिक शुल्क, जो नेटवर्क विस्तार में बाधा डाल रहे हैं।