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भारत सरकार की सर्वदलीय बैठक: मिडिल ईस्ट संकट पर चर्चा

भारत सरकार ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आयोजित की। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में कई वरिष्ठ मंत्रियों और विपक्षी नेताओं ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर चिंता जताई, विशेष रूप से ऊर्जा संकट के संभावित प्रभावों पर। जानें इस बैठक में क्या चर्चा हुई और भारत की स्थिति क्या है।
 

मिडिल ईस्ट में तनाव: भारत की प्रतिक्रिया


मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। इस संदर्भ में, भारत सरकार ने स्थिति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक आयोजित की, जो लगभग एक घंटे 45 मिनट तक चली। इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति और इसके संभावित प्रभावों पर गहन चर्चा की गई।


बैठक में शामिल प्रमुख नेता

बैठक में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित थे। गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने-अपने विभागों से संबंधित मुद्दों पर जानकारी साझा की। कांग्रेस की ओर से तारिक अनवर और मुकुल वासनिक ने भाग लिया, जबकि माकपा का प्रतिनिधित्व जॉन ब्रिटास ने किया।


विपक्षी दलों की भागीदारी भी इस बैठक में महत्वपूर्ण रही। समाजवादी पार्टी से जावेद अली, आम आदमी पार्टी से संजय सिंह, डीएमके के कलानिधि वीरासामी, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, टीडीपी के लवू कृष्णा और आरजेडी के अभय कुशवाहा समेत कई नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी दलों ने इस अंतरराष्ट्रीय संकट पर अपने विचार साझा किए और सरकार के साथ समन्वय पर जोर दिया।


पीएम मोदी का बयान

इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है, इसलिए भारत को सतर्क रहना आवश्यक है।


प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ऊर्जा संकट की आशंका पर चिंता व्यक्त की। उनके अनुसार, इस युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे पेट्रोल और डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है, यह स्थिति देश के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है।


उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ रहे असर से आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो रही है। हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।