भारतीय नौसेना का ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
भारतीय सशस्त्र बलों ने हाल ही में पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के खिलाफ एक समन्वित और बहुस्तरीय प्रतिक्रिया शुरू की। इस कार्रवाई में भारतीय नौसेना ने वायु, जल और जलमग्न क्षेत्रों में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। विशेष रूप से, पश्चिमी बेड़े ने उच्चतम स्तर पर युद्ध तत्परता दिखाई। इस लेख में जानें कि कैसे भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने साहस और नेतृत्व का प्रदर्शन किया और इस ऑपरेशन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ क्या थीं।
Apr 7, 2026, 15:13 IST
भारतीय सशस्त्र बलों की बहुस्तरीय प्रतिक्रिया
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत एक समन्वित और बहुस्तरीय प्रतिक्रिया शुरू की। इस कार्रवाई में पाकिस्तानी बलों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए गए। भारतीय नौसेना ने वायु, जल और जलमग्न क्षेत्रों में अपनी ताकत का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के रक्षात्मक ठिकानों पर दबाव डाला। नौसेना की तैनाती ने एक व्यापक नाकाबंदी स्थापित की, जिसमें वायु, जल और जलमग्न क्षेत्र शामिल थे। भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों और पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों ने दुश्मन की गतिविधियों की निरंतर निगरानी में सहायता की। जलमग्न क्षेत्र में, युद्धपोतों और फ्रिगेट ने प्रमुख समुद्री मार्गों पर नियंत्रण स्थापित किया, जबकि चार पनडुब्बियों को गुप्त रूप से तैनात किया गया, जो दुश्मन बलों के लिए एक अदृश्य लेकिन घातक खतरा बनीं।
सतही कार्रवाई समूह और विमानवाहक पोत युद्ध
भारतीय नौसेना के सतही कार्रवाई समूहों को तुरंत अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया गया, जिससे एक आक्रामक समुद्री उपस्थिति स्थापित हुई। विध्वंसक, फ्रिगेट, एकीकृत हेलीकॉप्टर और अन्य पोतों ने मिलकर मजबूत समुद्री नियंत्रण सुनिश्चित किया। विशेष अभियानों के लिए मरीन कमांडो (मार्कोस) को अग्रिम मोर्चों पर तैनात किया गया, जिससे संभावित शत्रु ठिकानों पर सटीक हमले संभव हुए। इस तैनाती ने शत्रु की नौसैनिक गतिविधियों को प्रभावी ढंग से सीमित कर दिया, जिससे उन्हें रक्षात्मक स्थिति अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पश्चिमी बेड़े की युद्ध तत्परता
वाइस एडमिरल राहुल विलास गोखले के नेतृत्व में, पश्चिमी बेड़े ने उच्चतम स्तर पर मिसाइल फायरिंग अभ्यास, हथियार तैनाती और युद्ध तैयारी की। केवल 96 घंटों में, बेड़े ने सफलतापूर्वक मिसाइल फायरिंग की और सभी प्रमुख हथियार प्रणालियों को पूरी तरह से तैनात किया। अरब सागर में विमानवाहक पोत युद्ध समूह और सतही कार्रवाई समूहों की पूर्व-नियोजित तैनाती ने समुद्री क्षेत्रों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया, जिससे शत्रु की गतिविधियों को सीमित किया गया।
नेतृत्व और शौर्य का प्रदर्शन
भारतीय नौसेना के कई अधिकारियों ने असाधारण साहस, नेतृत्व और परिचालन कौशल का प्रदर्शन किया।
कैप्टन सूरज जेम्स रिवेरा ने चार दिवसीय उच्च-खतरे वाले मिशन में सरफेस एक्शन ग्रुप का नेतृत्व किया, सभी मिशन उद्देश्यों को पूरा किया।
कैप्टन विकास गर्ग ने एक अग्रिम पंक्ति के फ्रिगेट की कमान संभाली, उच्चतम युद्ध तत्परता बनाए रखी।
कैप्टन प्यास कुट्टियार ने शत्रु क्षेत्रों में पनडुब्बी का संचालन किया और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी जुटाई।
कमांडर राजेश्वर कुमार शर्मा ने उत्तरी अरब सागर में मजबूत प्रतिरोध क्षमता का प्रदर्शन किया।
कमांडर विवेक कुरियाको ने उच्च जोखिम वाले पनडुब्बी अभियानों का संचालन किया।
कमांडर कपिल कुमार ने पनडुब्बी अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
कमांडर सौरभ कुमार ने चुनौतीपूर्ण मौसम में एक आईएसआर मिशन के दौरान विमान और चालक दल को सुरक्षित किया।
लेफ्टिनेंट कमांडर ऋषभ पुरविया ने जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवादी शिविर पर सफल हमले का नेतृत्व किया।