मणिपुर में असम राइफल्स के शिविर पर भीड़ का हमला, स्थिति नियंत्रण में
सेनापति में हिंसा का मामला
सेनापति/इंफाल में मणिपुर के सेनापति जिले में एक तलाशी अभियान के बाद, एक बड़ी भीड़ ने असम राइफल्स के शिविर पर हमला किया। इस दौरान, भीड़ ने तोड़फोड़ की, तीन सुरक्षा वाहनों को आग के हवाले कर दिया और पथराव किया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले छोड़े और हवा में गोलियां चलाईं।
अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार रात लगभग 9:30 बजे, बड़ी संख्या में लोग जिला मुख्यालय स्थित असम राइफल्स के शिविर के पास इकट्ठा हो गए। भीड़ ने पत्थरबाजी की, शिविर में तोड़फोड़ की और आगजनी का प्रयास किया। एक हल्के वाहन को आग लगा दी गई, जबकि दो ट्रकों को पलटकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस हिंसा में एक नागरिक की कार भी जल गई और शिविर के बाहर का प्रतीक्षालय भी आग की चपेट में आ गया।
रक्षा विभाग ने बताया कि इससे कुछ घंटे पहले असम राइफल्स ने ओकलांग क्षेत्र में तलाशी और गश्त अभियान चलाया था। खुफिया जानकारी मिली थी कि एनएससीएन-आईएम के हथियारबंद कैडर, जो संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन कर रहे थे, निर्धारित शिविरों से बाहर घूम रहे हैं। इस जानकारी को संघर्षविराम निगरानी समूह (सीएफएमजी) को भी सूचित किया गया था।
जब सुरक्षा बल मकुइलॉन्गडी और ओकलांग गांवों की ओर बढ़े, तो स्थानीय लोग, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद सेनापति शहर में भीड़ जुटने लगी और रात तक स्थिति हिंसक हो गई।
स्थिति बिगड़ने पर सेनापति जिला पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को बुलाया गया। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे और हवा में गोलियां चलाकर भीड़ को तितर-बितर किया। अधिकारियों का कहना है कि अब स्थिति नियंत्रण में है और शांति बनाए रखने के लिए नागरिक संगठनों और जिला प्रशासन के साथ संवाद जारी है।
यह ध्यान देने योग्य है कि 6 जुलाई को उखरुल जिले में असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर किए गए हमले में दो जवान मारे गए थे। मणिपुर में तीन वर्ष पहले शुरू हुई जातीय हिंसा के बाद से सुरक्षा बल संवेदनशील इलाकों में लगातार तलाशी और गश्त अभियान चला रहे हैं। मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।