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मणिपुर में नई सरकार का गठन, वाई खेमचंद सिंह बने मुख्यमंत्री

मणिपुर में वाई खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जिससे राज्य में राजनीतिक स्थिरता की नई उम्मीद जगी है। राष्ट्रपति शासन को समाप्त कर दिया गया है, और नई सरकार के गठन को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना माना जा रहा है। जानें इस बदलाव के पीछे की कहानी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया।
 

मुख्यमंत्री के रूप में वाई खेमचंद सिंह की शपथ


इंफाल: मणिपुर, जो जातीय हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता का सामना कर रहा था, को अब एक नई निर्वाचित सरकार मिल गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता वाई खेमचंद सिंह ने बुधवार को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। यह सत्ता परिवर्तन फरवरी 2025 से राष्ट्रपति शासन के अधीन रहे मणिपुर के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना है। शपथ ग्रहण के साथ ही केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन को तुरंत समाप्त करने की घोषणा की।


उपमुख्यमंत्रियों के साथ शपथ ग्रहण

मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह के साथ कूकी समुदाय से भाजपा विधायक नेमचा किपगेन और नागा पीपुल्स फ्रंट के नेता एल. डिखो ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके अलावा, कोंथौजम गोविंदास सिंह और खुराइजम लोकेन सिंह ने मंत्री पद ग्रहण किया। इस शपथ ग्रहण समारोह को राज्य में राजनीतिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


प्रधानमंत्री और केंद्र की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मुख्यमंत्री और उनकी टीम को बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई सरकार मणिपुर के लोगों के लिए विकास और समृद्धि की दिशा में ईमानदारी से कार्य करेगी। इसी दिन गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति शासन को समाप्त करने की अधिसूचना जारी की, जिससे राज्य में पूर्ण संवैधानिक व्यवस्था बहाल हो गई।


नई दिल्ली में नेतृत्व पर सहमति

खेमचंद सिंह को भाजपा विधायक दल का नेता नई दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में चुना गया। इस बैठक में मणिपुर के 37 में से 35 भाजपा विधायक उपस्थित थे। इसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक तरुण चुघ, पूर्वोत्तर प्रभारी संबित पात्रा और प्रदेश अध्यक्ष ए. शारदा देवी शामिल हुए। इसके बाद एनडीए सहयोगी दलों ने भी सर्वसम्मति से उनके नेतृत्व का समर्थन किया।


राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि

पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने फरवरी 2025 में इस्तीफा दिया था। उनकी सरकार पर मई 2023 से शुरू हुए मैतेई और कूकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष को नियंत्रित करने में असफल रहने के आरोप लगे थे। हालात बिगड़ने पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। एक साल बाद नई सरकार का गठन मणिपुर के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।