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मणिशंकर अय्यर के बयान पर उठे सवाल: विपक्षी गठबंधन की राजनीति का सच

मणिशंकर अय्यर के हालिया बयानों ने विपक्षी गठबंधन की राजनीति में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके विचारों का राजनीतिक महत्व और राहुल गांधी तथा ममता बनर्जी की भूमिका पर चर्चा की गई है। क्या अय्यर के बयान कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए हैं? जानें इस लेख में।
 

मणिशंकर अय्यर के बयान का राजनीतिक संदर्भ

मणिशंकर अय्यर द्वारा विपक्षी गठबंधन के बारे में दिए गए बयान का कोई ठोस राजनीतिक महत्व नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि वे न तो विपक्ष की राजनीति को समझते हैं और न ही भविष्य की चुनौतियों को। उनके बयान केवल कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से हैं। दक्षिण के दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनावों के चलते उनकी बातों को मीडिया में महत्व मिल रहा है, जिससे वे अपनी आगामी किताब का भी प्रचार कर रहे हैं।


अय्यर ने पहले केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन की प्रशंसा की, यह कहते हुए कि उन्होंने अपने 10 साल के कार्यकाल में काफी काम किया है और उन्हें तीसरी बार जीतना चाहिए। यह ध्यान देने योग्य है कि केरल में कांग्रेस सत्ता में आने की उम्मीद कर रही है, जबकि अय्यर कांग्रेस की संभावनाओं को कमजोर करने में लगे हैं। इसके बाद, उन्होंने एमके स्टालिन की भी तारीफ की, यह कहते हुए कि वे विपक्षी गठबंधन को एकजुट रखने में सक्षम हैं। अंत में, अय्यर ने ममता बनर्जी को भी समर्थन दिया, यह सुझाव देते हुए कि वे विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व कर सकती हैं।


राहुल गांधी और ममता बनर्जी की भूमिका

यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि राहुल गांधी कभी भी विपक्षी गठबंधन के नेता नहीं रहे हैं। कांग्रेस, जो सबसे बड़ी पार्टी है, स्वाभाविक रूप से नेतृत्व करती है। इसके अलावा, ममता बनर्जी ने शुरुआती दिनों को छोड़कर कभी भी 'इंडिया' ब्लॉक का हिस्सा नहीं रहीं। नीतीश कुमार की पहल पर जून 2023 में 'इंडिया' ब्लॉक का गठन हुआ था, लेकिन जनवरी 2024 तक नीतीश भी इससे अलग हो गए थे और ममता भी। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि ममता ने 2024 का लोकसभा चुनाव विपक्षी गठबंधन के साथ नहीं लड़ा, बल्कि अकेले लड़ीं। इसके बावजूद, इंडिया ब्लॉक की पार्टियों ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी।


यह भी महत्वपूर्ण है कि ममता बनर्जी के कारण नीतीश कुमार गठबंधन से बाहर हो गए। यह एक पहेली बनी हुई है कि ममता ने किसके इशारे पर नीतीश को 'इंडिया' ब्लॉक का संयोजक बनने से रोका। जैसे ही उन्हें संयोजक बनने से रोका गया, नीतीश गठबंधन से बाहर हो गए और भाजपा ने उन्हें अपने साथ ले लिया। यदि वे भाजपा के साथ नहीं गए होते, तो बिहार में एनडीए बिखर जाता और नीतीश, तेजस्वी और कांग्रेस का गठबंधन बेहतर प्रदर्शन कर सकता था। इसलिए, मणिशंकर अय्यर के विचारों का कोई ठोस आधार नहीं है कि ममता, स्टालिन या विजयन गठबंधन का नेतृत्व करें। यह भारत की राजनीति का एक स्थापित सिद्धांत है कि सबसे बड़ी पार्टी ही गठबंधन का नेतृत्व करेगी।