मद्रास हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: पत्नी का व्यवहार मानसिक क्रूरता के दायरे में
महत्वपूर्ण निर्णय
चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने वैवाहिक संबंधों और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पत्नी जानबूझकर अपने पति को उसके वृद्ध माता-पिता से अलग रहने के लिए मजबूर करती है और बिना किसी ठोस कारण के बार-बार मायके जाती है, तो यह पति के प्रति मानसिक और वैवाहिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। जस्टिस पीटी आशा और जस्टिस एन. माला की खंडपीठ ने इस टिप्पणी के साथ फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए तलाक के आदेश को बरकरार रखा और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया।
शादी के बाद का तनाव
शादी के कुछ ही महीनों बाद अलग घर का दबाव
इस मामले में, दोनों का विवाह जून 2019 में हुआ था। पति ने आरोप लगाया कि शादी के तुरंत बाद से पत्नी का व्यवहार असहयोगात्मक रहा। शादी के दो महीने बाद, पत्नी अपने मायके चली गई और लगभग चार महीने तक ससुराल नहीं लौटी। पति और ससुराल वालों ने उसे वापस लाने की कोशिश की, लेकिन उसने लौटने से मना कर दिया। बाद में, उसने यह शर्त रखी कि वह तभी साथ रहेगी जब पति अपने बुजुर्ग माता-पिता का घर छोड़कर अलग रहेगा। पति अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उसके ऊपर थी, फिर भी पारिवारिक शांति के लिए उसने अलग रहने का निर्णय लिया।
अलग रहने के बाद भी समस्याएं
अलग रहने के बाद भी नहीं बनी बात, मायके के पास घर लेने की जिद
अलग घर में रहने के बावजूद पत्नी का व्यवहार नहीं बदला और वह वहां भी केवल एक महीने तक रही। इसके बाद, उसने अपने मायके के पास नया मकान लेने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। इस मुद्दे पर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया, जिसके बाद पत्नी फिर से अपने मायके चली गई। परेशान होकर पति ने फैमिली कोर्ट में मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्जी दी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
दहेज प्रताड़ना का आरोप
दहेज प्रताड़ना के आरोप, लेकिन कोर्ट में गवाही से भागी पत्नी
फैमिली कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची पत्नी ने दलील दी कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया था, जिसके कारण उन्हें अलग रहने का निर्णय लेना पड़ा। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने बेटी के जन्म के बाद उससे मिलने से मना कर दिया। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया के दौरान पत्नी का यह पक्ष कमजोर साबित हुआ, क्योंकि उसने फैमिली कोर्ट में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए और न ही गवाह के रूप में जिरह का सामना किया।
हाईकोर्ट का सख्त रुख
‘सिर्फ एक पक्ष की शर्तों पर नहीं चल सकता विवाह’
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि दांपत्य जीवन प्रेम, आपसी समझ और सामंजस्य पर आधारित होता है। विवाह को किसी एक पक्ष की मनमानी शर्तों पर नहीं चलाया जा सकता। अदालत ने माना कि पति के माता-पिता की देखभाल उसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है, और पत्नी का अलग रहने के लिए दबाव डालना गंभीर मानसिक प्रताड़ना है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को सही ठहराया।