मध्य प्रदेश में राज्य सभा चुनाव: बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
राज्य सभा चुनाव पर नजरें
नई दिल्ली: राज्य सभा चुनाव में मध्य प्रदेश की स्थिति पर सभी की निगाहें हैं। यहां तीन सीटों के लिए चार उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। बीजेपी ने तीन प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी की करीबी सहयोगी मिनाक्षी नटराजन चुनाव लड़ रही हैं। बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के आने से चुनावी मुकाबला और भी दिलचस्प हो गया है, जिससे क्रॉस वोटिंग का खतरा भी बढ़ गया है। इन सीटों पर राजनीतिक शह-मात का खेल शुरू हो चुका है।
विधायकों की संख्या के अनुसार, दो सीटें बीजेपी और एक सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित मानी जा रही थीं, लेकिन बीजेपी ने महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतारकर मिनाक्षी नटराजन की स्थिति को चुनौती दी है। बीजेपी ने तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को भी मैदान में उतारा है। इन नामों की घोषणा के बाद निर्विरोध चुनाव की संभावना समाप्त हो गई है और अब वोटिंग के जरिए निर्णय होगा।
राज्य सभा चुनाव में संख्या का खेल
मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं, लेकिन वर्तमान में 228 सदस्य हैं। इनमें बीजेपी के 164 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। राज्य सभा की एक सीट पर उम्मीदवार को कम से कम 58 विधायकों का समर्थन चाहिए। विधायकों की संख्या के आधार पर, बीजेपी की दो सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं और कांग्रेस एक सीट जीत सकती है। लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के आने से स्थिति जटिल हो गई है।
बीजेपी को दो सीटें जीतने के लिए 116 विधायकों के वोट की आवश्यकता होगी। इसके बाद, उन्हें 48 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। वहीं, कांग्रेस 64 विधायकों के बल पर एक सीट जीत सकती है, लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार के आने से स्थिति और भी कठिन हो गई है।
तीसरी राज्य सभा सीट के लिए मुकाबला
बीजेपी को दो सीटें सुरक्षित करने के बाद तीसरी सीट जीतने के लिए 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए आवश्यक संख्या है, लेकिन बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं। महेश केवट के मैदान में आने से कांग्रेस की स्थिति और भी कमजोर हो गई है। बीजेपी का यह कदम दर्शाता है कि पार्टी को अपने विधायकों के समर्थन पर भरोसा है या फिर उसे लगता है कि क्रॉस वोटिंग परिणाम को बदल सकती है।
कांग्रेस के लिए यह अपनी पार्टी को एकजुट रखने और उस सीट को बचाने की चुनौती है, जो वर्तमान आंकड़ों के अनुसार उसकी पहुंच में है।
कांग्रेस की चिंताएं
कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, लेकिन विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा को चुनाव हलफनामे के मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने वोट डालने से रोक दिया है। वहीं, बीना से विधायक निर्मला सप्रे लोक सभा चुनाव से पहले अनौपचारिक रूप से बीजेपी में शामिल हो गई थीं, जिससे उनकी अयोग्यता का मामला फंसा है। दतिया के राजेन्द्र भारती को पहले ही अयोग्य घोषित किया जा चुका है। इस प्रकार, कांग्रेस के पास अब 62 वैध वोट बचे हैं।
हालांकि आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस एक सीट आसानी से जीत सकती है, लेकिन बगावत के चलते क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। मिनाक्षी नटराजन के मैदान में आने से पार्टी में असंतोष भी बढ़ा है, जिससे कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है।