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मनन कुमार मिश्रा का विवाद: छात्रों का गुस्सा भड़काने वाला बयान

बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने हाल ही में छात्रों का गुस्सा भड़काने वाला बयान दिया, जिसके बाद हंगामा मच गया। नलसार के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस से सर्टिफिकेट लेने से मना कर दिया, जिसके चलते मनन मिश्रा ने उन्हें वकील के तौर पर एनरॉलमेंट से रोकने की घोषणा की। इस विवाद ने छात्रों के बीच और समर्थन जुटाया और एनएलएसआईयू के छात्रों ने भी चीफ जस्टिस का बहिष्कार करने का ऐलान किया। जानें इस पूरे घटनाक्रम के बारे में।
 

मनन मिश्रा का विवादास्पद बयान


बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने हाल ही में छात्रों और युवाओं के गुस्से को और भड़का दिया है। वे पिछले कई चुनावों में लगातार जीतते आ रहे हैं और पिछले 14 वर्षों से इस पद पर हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बिहार में खाली हुई दो राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें उच्च सदन में भेजा है।


हाल ही में, उन्होंने हैदराबाद की नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी और रिसर्च सेंटर, नलसार के छात्रों को भड़काने वाला बयान दिया। दरअसल, नलसार के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस सूर्यकांत से सर्टिफिकेट लेने से मना कर दिया था। इस पर मनन मिश्रा ने घोषणा की कि इस बैच के छात्रों का वकील के तौर पर एनरॉलमेंट नहीं होगा। उनके इस आदेश के बाद हंगामा मच गया, जिसके चलते उन्हें एक घंटे में अपना आदेश वापस लेना पड़ा और माफी मांगनी पड़ी।


मनन मिश्रा ने यह नहीं सोचा कि जंतर मंतर से हाल ही में उठकर गए छात्र अभी भी आंदोलित हैं। वे सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और प्रधानमंत्री से लेकर पूरी सरकार उनके गुस्से को ठंडा करने में लगी है। उनकी दंडात्मक कार्रवाई की घोषणा ने नलसार के छात्रों को और समर्थन दिलाया। इसके बाद, नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) के छात्रों ने भी चीफ जस्टिस के बहिष्कार का ऐलान किया।


मनन मिश्रा ने खुद को चीफ जस्टिस और सरकार के प्रति समर्पित दिखाने के प्रयास में सबको और मुश्किल में डाल दिया। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें फटकार लगाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों और उनके बीच बोलने वाले वे कौन होते हैं। उन्होंने छात्रों के बहिष्कार के अधिकार का समर्थन किया, लेकिन मनन मिश्रा की बातों से छात्र इतने भड़क गए कि चीफ जस्टिस की आउटरीच भी सफल नहीं हो रही है।