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ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच नंदीग्राम में चुनावी टकराव

ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच नंदीग्राम में चुनावी टकराव की तैयारी चल रही है। तृणमूल कांग्रेस के जानकार नेताओं का मानना है कि ममता इस बार नंदीग्राम में अपनी पिछली हार का बदला लेने की योजना बना रही हैं। पिछले चुनाव में शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देने के बाद, ममता ने नंदीग्राम को एक बार फिर से चुनावी रणभूमि बनाने का निर्णय लिया है। जानें इस चुनावी रणनीति के पीछे की कहानी और क्या ममता इस बार सफल होंगी।
 

नंदीग्राम: चुनावी रणनीति का नया मैदान

तृणमूल कांग्रेस के विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार विधानसभा चुनाव का मुख्य केंद्र भवानीपुर नहीं, बल्कि नंदीग्राम होगा। पिछली बार ममता बनर्जी ने नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी को चुनौती दी थी। उनकी पार्टी को भारी बहुमत मिला, लेकिन ममता खुद लगभग दो हजार वोटों से हार गई थीं। इसके बाद उन्होंने भवानीपुर सीट को खाली कर उपचुनाव लड़ा। इस बार शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में ममता को चुनौती देने का फैसला किया है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी नंदीग्राम को एक बार फिर से चुनावी रणभूमि बनाकर शुभेंदु अधिकारी को वहां घेरने की योजना बना रही हैं।


तृणमूल के जानकार नेताओं का मानना है कि ममता बनर्जी इस बार नंदीग्राम में वही करना चाहती हैं जो राहुल गांधी ने पिछले लोकसभा चुनाव में अमेठी में किया था। जैसे राहुल ने अमेठी में अपनी हार का बदला लिया, उसी तरह ममता भी नंदीग्राम में अपनी पिछली हार का प्रतिशोध लेना चाहती हैं।


2019 के चुनाव में स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को अमेठी में हराया था। लेकिन 2024 में राहुल ने अपने करीबी सहयोगी किशोरी लाल को टिकट देकर स्मृति को हरवाया। इस बार ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी के करीबी पवित्र कर को नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया है। पवित्र कर पहले तृणमूल कांग्रेस के सदस्य थे, लेकिन जब शुभेंदु ने पार्टी छोड़ी, तो वे भी उनके साथ चले गए। ममता ने उन्हें पार्टी में वापस लाकर टिकट दिया है। अपनी भवानीपुर सीट पर मुकाबला आसान बनाने के लिए ममता चाहती हैं कि नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी को कठिन लड़ाई में उलझाया जाए। ध्यान देने वाली बात यह है कि नंदीग्राम और मेदिनीपुर का पूरा क्षेत्र अधिकारी परिवार का गढ़ है। लेकिन ममता ने उनके करीबी व्यक्ति को तोड़कर चुनाव में उतारा है, जो एक सोची-समझी रणनीति का संकेत देता है।