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ममता बनर्जी का धरना जारी, मतदाता सूची में नाम कटने पर उठाई आवाज़

कोलकाता में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना जारी है, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची से नाम कटने के खिलाफ आवाज उठाई है। धरने के दौरान, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल को बांटने की साजिश कर रही है। ममता ने युवाओं के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की और केंद्र सरकार पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। जानें इस धरने के पीछे की पूरी कहानी और ममता का क्या कहना है।
 

धरने का दूसरा दिन

कोलकाता में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बड़ी संख्या में नामों के हटने के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का धरना शनिवार को भी जारी रहा। ममता ने शुक्रवार को धरना शुरू किया था और पूरी रात वहीं रहीं। उन्होंने कोलकाता के एस्प्लेनेड मेट्रो चैनल पर दोपहर दो बजे से धरना प्रारंभ किया। ममता ने केंद्र पर आरोप लगाया कि कुछ जिलों को अलग करने की योजना बनाई जा रही है और कहा कि यदि भाजपा ऐसा करती है, तो इसका जवाब दिया जाएगा।


भाजपा पर आरोप

धरने के दूसरे दिन, ममता बनर्जी ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना बंगाल को बांटने की साजिश है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह बंगाल को विभाजित कर वोटों को छीनने की योजना बना रही है। ममता ने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, 'वे अन्य राज्यों में बंगाली भाषी लोगों को परेशान कर रहे हैं और बंगालियों को उनके वोट देने के अधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहे हैं।'


युवाओं के लिए सहायता

धरने के दौरान, ममता बनर्जी के साथ पार्टी के सभी विधायक और अन्य प्रमुख नेता भी मौजूद थे। उन्होंने शनिवार को बजट में घोषित योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि 10वीं पास कर चुके 21 से 40 साल के बेरोजगार युवाओं को सात मार्च से हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे। यह सहायता पहले अप्रैल में शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे तुरंत लागू किया जाएगा। ममता ने केंद्र सरकार पर भी हमला करते हुए कहा कि एलपीजी की कीमतें फिर से बढ़ा दी गई हैं। उन्होंने कहा, 'अब आपको 21 दिन पहले गैस बुक करानी होगी। अगर आपके घर में गैस खत्म हो जाए, तो आप 21 दिन क्या करेंगे? क्या आप घर पर खाना मंगवाएंगे? यहां तक कि केरोसिन का कोटा भी कम कर दिया गया है।'