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ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर पलटवार: राष्ट्रपति के सम्मान को लेकर उठे सवाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय भाजपा उनकी सरकार को जानबूझकर विवादों में घसीटती है। ममता ने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने एक तस्वीर का सहारा लेकर पीएम मोदी के आदिवासी नेताओं के प्रति सम्मान की कमी को उजागर किया। जानें इस राजनीतिक विवाद की पूरी कहानी और ममता का क्या कहना है।
 

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का तीखा बयान


कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सम्मान को लेकर चल रही बहस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, भाजपा उनकी और उनकी सरकार की छवि को खराब करने की कोशिश करती है। ममता ने प्रोटोकॉल के उल्लंघन के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्र की मंशा पर सवाल उठाए हैं। यह राजनीतिक विवाद अब एक नई दिशा में बढ़ चुका है, जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे पर संवैधानिक अनादर का आरोप लगा रहे हैं।


चुनाव के समय विवादों में घसीटने का आरोप

ममता बनर्जी ने कहा कि हर चुनाव के दौरान उनकी सरकार को जानबूझकर विवादों में घसीटा जाता है। उन्होंने केंद्र को चेतावनी दी कि राज्य को हर बात के लिए जिम्मेदार ठहराना बंद किया जाए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री वोट हासिल करने के लिए बंगाल की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। इसे उन्होंने केंद्र सरकार की एक सोची-समझी साजिश बताया, जिसका उद्देश्य वास्तविक प्रशासनिक मुद्दों से ध्यान भटकाना है।


आयोजन स्थल पर पहले दी थी चेतावनी

राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थल को लेकर उठे विवाद पर ममता ने कहा कि उन्होंने पहले ही अपनी आपत्ति लिखित में दर्ज कराई थी। उन्होंने फेसबुक पर भी अपनी चिंताओं को साझा किया था। ममता का कहना है कि केंद्र ने उनकी सभी चेतावनियों को नजरअंदाज कर दिया और अब जब मामला बढ़ चुका है, तो सारा दोष बंगाल सरकार पर डाला जा रहा है।


तस्वीर दिखाकर पीएम पर हमला

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में एक तस्वीर का सहारा लिया, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मू लालकृष्ण आडवाणी को सम्मानित कर रही हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी पास में बैठे हैं। ममता ने कहा कि यह तस्वीर प्रधानमंत्री के आदिवासी नेताओं के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें शिष्टाचार सिखा रहे हैं, वे खुद देश की सर्वोच्च गरिमा का अपमान कर रहे हैं।


जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष

राष्ट्रपति के स्वागत के लिए न पहुँचने की आलोचना का जवाब देते हुए ममता ने अपने धरने को प्राथमिकता दी। वह कोलकाता में एसआईआर के मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं और उनके लिए जनहित से ऊपर कुछ भी नहीं है। उन्होंने आलोचकों को याद दिलाया कि वे प्रोटोकॉल से ज्यादा लोगों की लड़ाई को महत्व देती हैं।


महिलाओं के सम्मान पर स्पष्ट रुख

प्रधानमंत्री द्वारा 'मातृशक्ति के अपमान' के आरोपों पर ममता ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटूट है और इसके लिए उन्हें किसी की सलाह की जरूरत नहीं है। ममता ने कहा कि वह महिला दिवस का जश्न हजार बार मनाने को तैयार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी बाहरी व्यक्ति उन्हें यह न बताए कि महिलाओं की गरिमा का सम्मान कैसे करना चाहिए।