ममता बनर्जी का बड़ा कदम: टीएमसी की सभी समितियों का भंग होना
टीएमसी में आंतरिक संकट
नई दिल्ली - पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों तक शासन करने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब संकट के कगार पर है। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत, पार्टी की सभी समितियों और फ्रंटल संगठनों को तुरंत भंग किया जाएगा।
इस कदम का कारण यह है कि निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने बुधवार को विधानसभा में प्रवेश किया, उनके साथ 59 विधायकों के समर्थन पत्र भी थे। उन्होंने दावा किया कि उनका गुट राज्य में मुख्य विपक्षी दल है, जबकि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के समर्थक अब अल्पमत में हैं।
टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह निर्णय सावधानीपूर्वक विचार के बाद लिया गया है। पार्टी ने सभी समितियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग करने का निर्णय लिया है।
पोस्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि पार्टी आत्मनिरीक्षण, प्रदर्शन समीक्षा और संगठनात्मक मूल्यांकन का एक व्यापक अभ्यास करेगी। इसके परिणामों के आधार पर, मूल निकाय और सभी फ्रंटल संगठनों की संरचना का पुनर्गठन किया जाएगा। पार्टी भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने संगठन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हाल ही में, जब ममता बनर्जी ने टीएमसी विधायकों की बैठक बुलाई थी, तब 60 विधायकों ने बैठक से अनुपस्थित रहने का निर्णय लिया था। इस घटना के बाद से पार्टी के टूटने की अटकलें लगाई जा रही थीं। इसी बीच, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को सोमवार को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।
ऋतब्रत बनर्जी ने निलंबन के बाद टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा की मांग पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वह किस प्रकार के जननेता हैं, जो पार्टी की हार के बाद 26 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले। अब वह केंद्रीय बलों की सुरक्षा मांग रहे हैं, जबकि पहले वह कहते थे कि जनता उनकी रक्षा के लिए मौजूद है।
उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को कॉर्पोरेट शैली में चला रहे हैं और टीएमसी पूरी तरह से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) पर निर्भर है।