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ममता बनर्जी की चुनावी चुनौती: ईडी की कार्रवाई और आईपैक की गिरफ्तारी

ममता बनर्जी ने हाल ही में एक चुनावी सभा में केंद्र सरकार और 19 राज्यों की सरकारों के खिलाफ अपनी लड़ाई का जिक्र किया। ईडी द्वारा आईपैक के निदेशक विनेश चंदेल की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और भी गर्म कर दिया है। जानें इस घटनाक्रम का चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा और ममता बनर्जी की रणनीति क्या है।
 

ममता बनर्जी का केंद्र सरकार से संघर्ष

हाल ही में एक चुनावी सभा में ममता बनर्जी ने कहा कि उन्हें केंद्र सरकार और 19 राज्यों की सरकारों के खिलाफ अकेले लड़ाई लड़नी है। उनकी पार्टी लगातार यह दावा कर रही है कि चुनाव आयोग और केंद्रीय एजेंसियों के साथ भी उनकी टकराव जारी है। इसका एक उदाहरण तब देखने को मिला जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पार्थ चटर्जी और उनके कई सहयोगियों के ठिकानों पर छापे मारे।


इसके बाद, ईडी ने ममता बनर्जी के चुनाव प्रबंधन के लिए जिम्मेदार आईपैक के निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार कर लिया। यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका चुनाव पर क्या प्रभाव पड़ेगा, लेकिन यह स्पष्ट है कि भाजपा के खिलाफ ममता बनर्जी की लड़ाई किस दिशा में जा रही है।


आईपैक पर छापे और गिरफ्तारी

ईडी ने 8 जनवरी को आईपैक के कार्यालय पर छापा मारा था। ममता बनर्जी के लिए चुनाव रणनीति तैयार करने वाली इस एजेंसी के निदेशकों प्रतीक जैन और विनेश चंदेल के ठिकानों पर भी छापे पड़े। उस समय, ममता बनर्जी आईपैक कार्यालय और प्रतीक जैन के निवास पर पहुंची थीं और आरोप लगाया था कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तृणमूल कांग्रेस की रणनीति को जानने के लिए छापे करवा रहे हैं।


अब, मतदान से केवल 10 दिन पहले, चंदेल की गिरफ्तारी हुई है। यह ध्यान देने योग्य है कि आईपैक के संस्थापक प्रशांत किशोर के अलग होने के बाद, चंदेल ने इस एजेंसी को मजबूत बनाए रखा और इसे संचालित किया। उनकी टीम ममता बनर्जी की पार्टी को 294 सीटों पर चुनाव लड़वा रही थी। लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान आईपैक की पूरी टीम को बिखेर दिया गया है। चंदेल की गिरफ्तारी कोयला तस्करी के मामले में हुई है, जिसमें कहा जा रहा है कि उन्हें तस्करी के पैसे दिए गए और काले धन को सफेद बनाया गया।