ममता बनर्जी की पार्टी में नई टूट की आशंका, श्रीकांत शिंदे की भूमिका पर नजर
तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं
तृणमूल कांग्रेस के चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी की चुनौतियाँ कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। उनकी पार्टी में बिखराव की स्थिति है, जहां 80 में से लगभग 65 विधायक एक अलग गुट बना चुके हैं। इसी तरह, 28 में से 20 लोकसभा सांसद भी एक अलग गुट में शामिल हो गए हैं। इसके अलावा, 13 में से चार राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है, और जल्द ही और सांसदों के इस्तीफे की संभावना है। यह संकेत मिल रहे हैं कि ममता बनर्जी की पार्टी में और भी टूट हो सकती है। यह दिलचस्प है कि यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में हो रहा है, जबकि इसकी पटकथा मुंबई और दिल्ली में लिखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, महाराष्ट्र में भाजपा की सहयोगी शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हाल के दिनों में श्रीकांत शिंदे की राजनीतिक गतिविधियों पर ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने उद्धव ठाकरे की पार्टी को तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कैसे ओमराजे निंबालकर को अकेले दिल्ली लाया गया और स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की, यह सब श्रीकांत शिंदे की रणनीति का हिस्सा था। आने वाले समय में उनकी राजनीति पर ध्यान देना आवश्यक होगा।
अब यह खबर आ रही है कि यदि ममता बनर्जी की पार्टी में फिर से टूट होती है, तो इसके पीछे भी श्रीकांत शिंदे का हाथ हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी की सबसे प्रतिबद्ध महिला सांसद महुआ मोइत्रा उनके संपर्क में हैं। यह भी कहा जा रहा है कि श्रीकांत शिंदे ने महुआ मोइत्रा को पाला बदलने के लिए तैयार कर लिया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि तृणमूल की अगली टूट कब होगी, लेकिन यह संभावना है कि यह संसद के मानसून सत्र से पहले हो सकती है। कहा जा रहा है कि मानसून सत्र में सरकार लोकसभा में 543 सदस्यों में से दो तिहाई बहुमत जुटाने में सफल हो सकती है, जिसका मतलब है कि 360 सांसद समर्थन में होंगे।