×

ममता बनर्जी को एक और झटका: टीएमसी सांसद काकोली घोष ने सभी पदों से दिया इस्तीफा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं। टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर एक बड़ा झटका दिया है। काकोली घोष की चार दशकों की वफादारी का अंत और उनकी सुरक्षा में वृद्धि के बीच, यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

कोलकाता में ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियाँ

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता खोने के बाद, पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की राजनीतिक समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। बुधवार को पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा, जब ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी और वरिष्ठ टीएमसी सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। काकोली घोष का यह निर्णय पार्टी के लिए पश्चिम बंगाल में एक महत्वपूर्ण संकट के रूप में देखा जा रहा है।


काकोली घोष की चार दशकों की वफादारी का अंत

काकोली घोष ने पिछले कई दशकों से टीएमसी के साथ मजबूती से खड़ी रहकर पार्टी की सबसे वरिष्ठ महिला नेताओं में अपनी पहचान बनाई है। वह लगभग 9-10 महीने तक लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप भी रहीं। हाल ही में, ममता बनर्जी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण पद से हटा दिया, जिससे वह काफी आहत हुईं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखा, '1976 से जुड़ाव, 1984 में सफर शुरू हुआ। आज मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है।'


केंद्र सरकार ने काकोली घोष को दी सुरक्षा

काकोली घोष के बगावती तेवरों के बीच, केंद्र सरकार ने उनकी सुरक्षा को बढ़ाते हुए 'Y' कैटेगरी की सुरक्षा प्रदान की। दिलचस्प बात यह है कि टीएमसी की हार के बाद, पार्टी के कई बड़े नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई, जबकि काकोली की सुरक्षा बढ़ाई गई। मंगलवार को, काकोली घोष ने टीएमसी के छह अन्य विधायकों के साथ पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में भाग लिया।


ममता की मुश्किलें बढ़ाने वाले विधायकों का समूह

बैठक में शामिल होने वाले विधायकों में काकोली घोष के अलावा देगंगा से टीएमसी विधायक अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल, हारोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायक भी शामिल थे। इससे पहले, काकोली घोष ने टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी की रणनीतिकार एजेंसी आईपैक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि काकोली घोष और इन विधायकों का जाना ममता बनर्जी के राजनीतिक भविष्य के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है।