ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को लिखा पत्र, एसआईआर की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री का पत्र और अदालत जाने की योजना
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को एसआईआर की कमियों को सुधारने या इसे समाप्त करने के लिए एक पत्र भेजा है। पत्र भेजने के एक दिन बाद, उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हुई मौतों के मामलों में वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। ममता ने बताया कि मंगलवार को इस संबंध में याचिका दायर की जाएगी।
ममता का आरोप और रैली में बयान
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग व्हाट्सऐप पर संचालित हो रहा है। दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में एक रैली के दौरान, ममता ने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 70 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट में एक आम नागरिक के रूप में पेश होने की अनुमति मांगेंगी।
सुप्रीम कोर्ट में जाने की इच्छा
ममता बनर्जी ने कहा, 'अगर जरूरत पड़ी, तो मैं सुप्रीम कोर्ट जाऊंगी और जनता के लिए पैरवी करूंगी। मैं जनता की आवाज बनूंगी।' उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कानून की पढ़ाई की है और वे एक विधिवत वकील हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा, 'अगर लोगों के अधिकार छीन लिए गए, तो आप भी गायब हो जाएंगे।'
मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल
ममता ने कहा कि गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी मतदान केंद्र पर वैधता साबित करने के लिए कतार में खड़ा किया गया। उन्होंने भावनात्मक अंदाज में कहा, 'अगर आपकी 85 वर्षीय मां को एम्बुलेंस में घसीटा जाए, तो दिल्ली के नेता क्या जवाब देंगे?' इसके साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि बुजुर्गों और हाल ही में अस्पताल से छुट्टी पाए लोगों को सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
लोगों को डराने की प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर में बिना वैध कारणों के मनमाने ढंग से वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे यह प्रक्रिया लोगों को डराने का एक साधन बन गई है।