ममता बनर्जी ने पार्टी को फिर से संगठित करने की दिशा में उठाए कदम
पार्टी नेताओं के साथ बैठक
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी हाल ही में चुनाव में मिली हार से उबरने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने पार्टी के नेताओं के साथ एक बैठक आयोजित की, जिसमें उन्होंने संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। ममता ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता टीएमसी छोड़कर अन्य दल में जाना चाहता है, तो वह स्वतंत्र है।
पार्टी दफ्तरों को फिर से सक्रिय करना
बैठक में ममता ने पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा, 'हम अपने दफ्तरों को फिर से खोलेंगे, उन्हें सजाएंगे और मजबूती से काम पर लौटेंगे। यदि आवश्यक हुआ, तो मैं स्वयं भी दफ्तरों को रंगने के लिए तैयार हूं।' उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अन्य पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें रोकने का उनका कोई इरादा नहीं है। इस बैठक में ममता के भतीजे और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी उपस्थित थे।
चुनाव परिणामों पर ममता का दृष्टिकोण
ममता ने पार्टी नेताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि भले ही चुनाव में टीएमसी को 80 सीटें मिली हों, यह जनादेश की चोरी है। इससे उनका हौसला नहीं टूटेगा। बैठक में फालता सीट पर होने वाले उपचुनाव के उम्मीदवार भी शामिल थे, जहां 21 मई को मतदान होना है। उल्लेखनीय है कि फालता में 29 अप्रैल को मतदान हुआ था, लेकिन ईवीएम में छेड़छाड़ के आरोपों के चलते चुनाव आयोग ने दोबारा मतदान कराने का निर्णय लिया।
चुनावी हिंसा पर ममता का बयान
चार मई को आए चुनाव परिणामों में भाजपा ने 207 सीटों के साथ बड़ी जीत हासिल की। इसके बाद ममता ने कोलकाता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी, क्योंकि उन्हें साजिश के तहत हराया गया है। इसके बाद ममता ने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सुजॉय पाल और जस्टिस पार्थसारथी सेन के समक्ष चुनावी हिंसा के मुद्दे पर पेश होकर बताया कि हाल के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में व्यापक हिंसा हुई है, जिसमें बुलडोजर कार्रवाई भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस एफआईआर दर्ज करने की अनुमति नहीं दे रही है।