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महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल: एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस की जंग

महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय एक नई उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जहां एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस के बीच सत्ता की जंग चल रही है। भाजपा के भीतर की खींचतान और नेताओं की महत्वाकांक्षाएं खुलकर सामने आ रही हैं। शिंदे ने उद्धव ठाकरे की पार्टी को तोड़कर अपनी ताकत बढ़ाई है, जबकि फड़नवीस अपनी सत्ता को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के पीछे की कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 

महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति


देश की राजनीति में इस समय काफी हलचल है, खासकर भाजपा के भीतर। यह पहली बार है जब पार्टी के अंदर की खींचतान खुलकर सामने आ रही है। नेताओं की महत्वाकांक्षाएं आपस में टकरा रही हैं, जिससे कई अंदरूनी बातें बाहर आ रही हैं और मीडिया में छप रही हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जिन्हें पहले दबा दिया जाता था। महाराष्ट्र की राजनीति इस समय सबसे ज्यादा दिलचस्प नजर आ रही है।


दिल्ली में कोई एकनाथ शिंदे को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि देवेंद्र फड़नवीस इस प्रयास को विफल करने में लगे हैं। शरद पवार के बाद, देवेंद्र फड़नवीस को महाराष्ट्र का नया चाणक्य माना जा रहा है। उनकी महत्वाकांक्षा चंद्रगुप्त बनने की है।


महाराष्ट्र में फड़नवीस अपनी सत्ता को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन शिंदे उनके लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। शिंदे ने उद्धव ठाकरे की पार्टी को दोबारा तोड़ा है, और इस बार उनके साथ छह लोकसभा सांसद भी चले गए हैं। शिंदे की शिवसेना अब एनडीए में 13 सांसदों वाली पार्टी बन गई है।


शिंदे की नजर उद्धव ठाकरे के 20 में से 14 विधायकों पर है। यदि ऐसा हुआ, तो विधानसभा में शिंदे के विधायकों की संख्या 57 से बढ़कर 71 हो जाएगी। भाजपा के पास 288 सदस्यीय सदन में 132 विधायक हैं, और फड़नवीस की सरकार को सुनेत्रा पवार की पार्टी का समर्थन भी प्राप्त है।


फड़नवीस नहीं चाहते कि शिंदे इतनी ताकतवर हो जाएं कि वे चुनौती पेश कर सकें। इसलिए, फड़नवीस उद्धव ठाकरे को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, उद्धव और फड़नवीस की एक हवाई यात्रा में मुलाकात हुई, जिसे संयोग बताया गया। लेकिन राजनीति में ऐसे संयोग कम ही होते हैं।


उद्धव ने कहा कि शिंदे का अभियान 'ऑपरेशन देवेंद्र' है, जिसका मतलब है कि शिंदे फड़नवीस को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। फड़नवीस सत्ता का संतुलन बनाए रखना चाहते हैं और इसलिए वे उद्धव ठाकरे को एक बफर के रूप में बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।