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महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका, 6 सांसदों ने अलग गुट बनाने का लिया फैसला

महाराष्ट्र की राजनीति में हाल ही में उद्धव ठाकरे को बड़ा झटका लगा है, जब उनकी शिवसेना के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर एक अलग गुट बनाने का निर्णय लिया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है, खासकर जब संसद का मानसून सत्र नजदीक है। जानें इस बगावत के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

संजय राउत ने बागियों पर कड़ी टिप्पणी की


महाराष्ट्र की राजनीति में हालात तेजी से बदल रहे हैं। आम आदमी पार्टी (आप) के बाद, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को एक बड़ा झटका लगा है। बुधवार को, 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर शिंदे गुट में विलय की अनुमति मांगी।


ओम बिरला ने अलग गुट को दी मंजूरी

सूत्रों के अनुसार, ओम बिरला ने इन छह सांसदों के गुट को अलग गुट के रूप में मान्यता दे दी है। ये सांसद गुरुवार को लोकसभा स्पीकर के सामने जाकर अपने पत्र पर हस्ताक्षर की पुष्टि करेंगे। पहले ही, यूबीटी के सांसदों ने एक अलग समूह बनाने के लिए स्पीकर को पत्र सौंपा था। इस बीच, संजय राउत ने बागी सांसदों को गाली देते हुए कहा कि ये लोग बेईमान हैं। उन्होंने बाद में कहा कि मराठी में ऐसे शब्द सामान्य हैं।


शिवसेना में दूसरी बड़ी टूट

यह शिवसेना में चार साल में दूसरी बार बड़ा विभाजन है। जून 2022 में, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत की थी। इससे पहले, अप्रैल में आप के सांसद राघव चड्ढा ने भी बगावत की थी। हाल ही में, टीएमसी के सांसदों ने भी एनडीए के साथ काम करने की इच्छा जताई है।


टीएमसी के बागी गुट का एनसीपीआई में विलय

टीएमसी के 28 सांसदों में से 20 ने हाल ही में त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी (एनसीपीआई) में विलय किया है। बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा स्पीकर को पत्र सौंपकर इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ काम करेंगे।


‘आप’ के सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा

‘आप’ के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद अप्रैल में बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। राघव चड्ढा के साथ अनबन के बाद, सभी सात सांसदों ने पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का निर्णय लिया। अब ‘आप’ के पास राज्यसभा में केवल 3 सीटें रह गई हैं।


महिला आरक्षण बिल पर चर्चा

संसद का मानसून सत्र अगले महीने शुरू होने वाला है, और इस दौरान सरकार महिला आरक्षण बिल को फिर से पेश कर सकती है। यदि टीएमसी के बागी सांसद और उद्धव गुट के सांसद समर्थन देते हैं, तो एनडीए की संख्या बढ़ जाएगी। हालांकि, आवश्यक 360 के आंकड़े से संख्या कम होगी।