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महाराष्ट्र में नवरात्रि पर गरबा विवाद: VHP की मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक की मांग

महाराष्ट्र में नवरात्रि पर्व के दौरान गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के प्रवेश पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) द्वारा रोक लगाने की मांग ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। VHP ने आयोजन समितियों को निर्देश दिए हैं कि कार्यक्रमों में शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों की पहचान की जांच की जाए। इस पर महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार त्योहार मनाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है, जहां विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक करार दिया है।
 

नवरात्रि पर्व पर नया विवाद


नई दिल्ली: महाराष्ट्र में नवरात्रि के पर्व को लेकर एक नया विवाद उत्पन्न हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य में होने वाले प्रसिद्ध गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने आयोजन समितियों को निर्देश देते हुए कहा है कि कार्यक्रमों में शामिल होने वाले सभी व्यक्तियों की पहचान की जांच की जानी चाहिए। इस निर्णय के बाद, राज्य में धार्मिक आयोजनों की मर्यादा और संवैधानिक अधिकारों पर एक नई बहस शुरू हो गई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सौहार्द को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाती है।


अल्पसंख्यक आयोग की प्रतिक्रिया

अल्पसंख्यक आयोग का रुख


महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने इस मुद्दे पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म के अनुसार त्योहार मनाने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन किसी एक समुदाय को इस तरह से सार्वजनिक उत्सवों से बाहर करना गलत है। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा आपसी प्रेम और निमंत्रण पर ऐसे आयोजनों में शामिल होते हैं, और कोई भी जबरदस्ती किसी के कार्यक्रम में नहीं जाता। इसलिए, किसी सार्वजनिक सांस्कृतिक आयोजन को विभाजन का कारण नहीं बनने देना चाहिए। त्योहार की तारीख नजदीक आने के साथ ही इस मुद्दे पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।


VHP की गाइडलाइंस

तिलक से होगी एंट्री की जांच


VHP के संयुक्त सचिव और प्रवक्ता श्रीराज नायर ने संगठन का पक्ष रखते हुए कहा कि नवरात्रि केवल नाच-गाने का पर्व नहीं है, बल्कि यह देवी दुर्गा की उपासना का पावन अवसर है। उन्होंने तर्क किया कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उनका इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होना उचित नहीं है। VHP ने आयोजकों को कई सुझाव दिए हैं, जिनमें गरबा पंडालों के प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं के पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड की जांच करने की बात शामिल है। इसके साथ ही, पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार माथे पर तिलक लगाकर ही पंडाल में प्रवेश की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है। VHP का कहना है कि यह कदम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि हिंदू संस्कृति के संरक्षण के लिए उठाया गया है।


राजनीतिक प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने उठाए तीखे सवाल


VHP के इस निर्णय के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए सत्ताधारी पक्ष और संघ के विचारों पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के हालिया भाषण का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत में हर नागरिक का सम्मान होना चाहिए। राउत ने पूछा कि क्या VHP अपने ही संगठन के प्रमुख के विचारों से असहमत है? कांग्रेस विधायक अमीन पटेल ने इसे सामाजिक सौहार्द पर हमला बताते हुए कहा कि भारत में त्योहार हमेशा से आपसी भाईचारे के प्रतीक रहे हैं। वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) के प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने राज्य सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या भाजपा सरकार कानून-व्यवस्था को किसी निजी संगठन के हाथों में सौंपने जा रही है?