महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण: कांग्रेस का नया दांव
महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
इस समय महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियाँ काफी रोचक हो रही हैं। भारतीय जनता पार्टी ने दो प्रमुख मराठा नेताओं, अजित पवार और एकनाथ शिंदे, के साथ मिलकर गैर-मराठा राजनीति को आगे बढ़ाया है। इस रणनीति के माध्यम से भाजपा ने 2024 के चुनाव में एक ऐतिहासिक जनादेश प्राप्त किया। भाजपा अब अकेले ही बहुमत के करीब पहुँच गई है। यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा की लंबे समय से चली आ रही राजनीति और हर राज्य की प्रमुख जातियों की राजनीतिक ताकत को कम करने का परिणाम है कि महाराष्ट्र में मराठा राजनीति कमजोर हुई है। भाजपा के बाद, कांग्रेस भी अब पारंपरिक रूप से गैर-मराठा राजनीति की दिशा में बढ़ रही है, यह जानते हुए कि मराठा वोट अधिकतर क्षत्रपों को जाते हैं। इसलिए, कांग्रेस ने यह राजनीति शरद पवार को सौंप दी है।
कांग्रेस का उपचुनाव में नया कदम
कांग्रेस ने बारामती सीट पर उपचुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जो गैर-मराठा राजनीति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महाराष्ट्र में यह परंपरा रही है कि किसी विधायक के निधन के बाद खाली हुई सीट पर यदि उसके परिवार का कोई सदस्य चुनाव लड़ रहा हो, तो बड़ी पार्टियाँ उम्मीदवार नहीं देती हैं। लेकिन कांग्रेस ने इस परंपरा को तोड़ते हुए आकाश मोरे को टिकट दिया है। उनके पिता, विजय राव मोरे, एक बार एमएलसी रह चुके हैं। आकाश मोरे ने 2014 में इस सीट पर अजित पवार के खिलाफ चुनाव लड़ा था और उनकी जमानत जब्त हो गई थी। वे धनगर जाति से हैं। राज्य की उपमुख्यमंत्री और दिवंगत अजित पवार की पत्नी, सुनेत्रा पवार, इस सीट से चुनाव लड़ रही हैं। उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से फोन पर अपील की थी कि कांग्रेस उम्मीदवार न उतारे। सपकाल, जो राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं, ने इनकार कर दिया। उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने भी उम्मीदवार नहीं दिया है। यह देखना दिलचस्प होगा कि पवार परिवार के इस गढ़ में आकाश मोरे कितने वोट प्राप्त कर पाते हैं।