महिला आरक्षण अधिनियम: संसद में गरमागरम बहस और वोटिंग की तैयारी
संसद में महिला आरक्षण पर बहस
महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर संसद में देर रात तक तीखी बहस हुई। पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए। आज शाम 4 बजे इस पर वोटिंग होने वाली है, जिस पर सभी की नजरें हैं। इसी बीच, केंद्रीय कानून मंत्रालय ने एक नोटिफिकेशन जारी किया है, जिसके अनुसार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम-2023 16 अप्रैल 2026 से लागू होगा। हालांकि, इस समय सीमा को लेकर कुछ सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि संसद में अभी संशोधन पर चर्चा चल रही है।
आरक्षण का लाभ कब मिलेगा?
सरकार द्वारा कानून लागू करने के बावजूद इसका लाभ तुरंत नहीं मिलेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह आरक्षण अगली जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा लोकसभा में महिलाओं को इसका सीधा लाभ नहीं मिलेगा। पहले नई जनगणना होगी, फिर सीटों का पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) किया जाएगा, और उसके बाद ही आरक्षण लागू होगा।
महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित
नोटिफिकेशन में बताया गया है कि संविधान के 106वें संशोधन के तहत यह प्रावधान लागू किया गया है। यह वही कानून है जिसे सितंबर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के रूप में पारित किया गया था। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। हालांकि, इसमें यह शर्त रखी गई थी कि आरक्षण तभी लागू होगा जब नई जनगणना के बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
सरकार का राजनीतिक लाभ न लेने का दावा
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर कहा कि सरकार चाहती है कि सभी दल इस ऐतिहासिक फैसले का समर्थन करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक लाभ नहीं लेना चाहती। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों से इस बिल के समर्थन की अपील की है।
विपक्ष पर सरकार का पलटवार
रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस बिल को लेकर सभी राजनीतिक दलों से बातचीत की है। उन्होंने बताया कि मल्लिकार्जुन खड़गे को तीन बार पत्र लिखा गया और अन्य दलों के नेताओं से भी मुलाकात कर समर्थन मांगा गया। सरकार का कहना है कि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देना पूरे देश की जिम्मेदारी है।
महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बयान
संसद में अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जो भी महिला आरक्षण का विरोध करता है, उसे जनता ने हमेशा जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले को राजनीति के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे देश के विकास और महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में समझना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल
प्रियंका गांधी ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिल के मौजूदा स्वरूप में कुछ ऐसे बिंदु हैं, जो पहले के प्रस्ताव से अलग हैं। प्रियंका गांधी के अनुसार, नए प्रस्ताव में सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है और आगे भी महिलाओं के हक में खड़ी रहेगी।