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महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की योजना, 2029 चुनाव में लागू होने की संभावना

संसद में महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की योजना पर चर्चा चल रही है। यह कदम 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण को लागू करने के लिए उठाया जा रहा है। जानिए इस प्रक्रिया में जनगणना और परिसीमन की भूमिका क्या होगी और कैसे लॉटरी के माध्यम से महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण किया जा सकता है।
 

महिला आरक्षण पर नई चर्चा

संसद के वर्तमान सत्र में महिला आरक्षण पर चर्चा चल रही है। सूत्रों के अनुसार, इसे परिसीमन से अलग करने की योजना बनाई जा रही है। ध्यान देने योग्य है कि संसद की नई इमारत में पहला विधेयक, नारी शक्ति वंदन कानून, सितंबर 2023 में पारित हुआ था। इस विधेयक के तहत, संविधान के 106वें संशोधन के माध्यम से महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया। हालांकि, यह कानून जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होगा, जिससे इसकी प्रक्रिया में देरी हो रही है।


जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया

सरकार ने जनगणना की अधिसूचना जारी कर दी है। पहले चरण की जनगणना इस वर्ष होगी, जबकि दूसरे चरण में नागरिकों की जाति सहित गिनती अगले वर्ष की जाएगी। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में जनगणना के आंकड़े उपलब्ध होंगे। इसके बाद परिसीमन आयोग का गठन किया जाएगा, जिसमें दो साल या उससे अधिक समय लग सकता है। इस स्थिति में, 2029 के चुनावों तक परिसीमन संभव नहीं होगा, और यदि परिसीमन नहीं हुआ, तो महिला आरक्षण भी लागू नहीं हो सकेगा। इसलिए, महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि इसे 2029 के लोकसभा चुनावों में लागू किया जा सके। यह भी बताया जा रहा है कि महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण लॉटरी के माध्यम से किया जा सकता है।