महिला आरक्षण पर अकाली दल की स्थिति स्पष्ट, जनसंख्या आधारित परिसीमन पर उठे सवाल
संसद में सियासी बयानबाजी तेज
नई दिल्ली - संसद के मानसून सत्र के दौरान महिला आरक्षण, परिसीमन, एफसीआरए और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी में तेजी आई है। विपक्षी दलों ने सरकार से कई मुद्दों पर जवाब मांगा है। शिरोमणि अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने महिला आरक्षण के समर्थन में अपनी बात दोहराते हुए कहा कि पार्टी का विरोध जनसंख्या-आधारित परिसीमन के उस फॉर्मूले से है, जो पंजाब की लोकसभा सीटों की संख्या को कम कर सकता है।
हरसिमरत कौर बादल का बयान
हरसिमरत कौर बादल ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि अकाली दल 2023 में महिला आरक्षण विधेयक के पेश होने के समय से ही इसके समर्थन में रहा है। पार्टी ने तब भी कानून को जल्द लागू करने की मांग की थी। जब अप्रैल में यह मुद्दा फिर से उठाया गया, तब भी अकाली दल का यही रुख था। हालांकि, उन्होंने जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्वितरण के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई।
पंजाब के युवाओं की स्थिति
बादल ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रोजगार के अवसरों की कमी के कारण पंजाब से कई युवा अन्य राज्यों में चले गए हैं। ऐसे में जनसंख्या आधारित फॉर्मूला पंजाब के लिए हानिकारक हो सकता है। इस फॉर्मूले के कारण पंजाब की लोकसभा सीटें मौजूदा 13 से कम हो सकती हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव विधेयक में शामिल किया जाए, तो पंजाब की सीटें लगभग 19-20 हो सकती हैं, जिससे महिलाओं के लिए भी 7-8 अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष का रुख स्पष्ट है और सरकार को महिला आरक्षण बिल पर जल्द निर्णय लेना चाहिए। कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि अकाली दल और अन्य दलों के बीच गठबंधन का निर्णय उनका आंतरिक मामला है। कांग्रेस पंजाब में अपने दम पर चुनाव लड़ने के लिए तैयार है।
शशि थरूर का स्पष्टीकरण
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने हालिया बयान पर उठे विवाद पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी बातचीत को संदर्भ में सुनना चाहिए। थरूर ने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी पर हमला नहीं था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और अन्य लोगों ने पहले भी संबंधित मुद्दों को उठाया था।
एफसीआरए और परिसीमन विधेयकों पर कांग्रेस का रुख
थरूर ने एफसीआरए और परिसीमन विधेयकों पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि सरकार इन विधेयकों का अंतिम टेक्स्ट किस रूप में प्रस्तुत करती है। उन्होंने कहा कि अभी तक जिन प्रावधानों की जानकारी मिली है, उनके आधार पर कांग्रेस इन विधेयकों से सहमत नहीं है और उनका विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है।