महिला आरक्षण बिल: कांग्रेस ने सरकार पर लगाया आरोप
महिला आरक्षण बिल का विवाद
महिला आरक्षण: केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए हैं, जिनमें संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। हालांकि, संविधान संशोधन (131वां संशोधन) विधेयक पारित नहीं हो सका। इसके बाद भाजपा और उसके सहयोगियों ने विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया। कांग्रेस का कहना है कि महिला आरक्षण बिल 2023 में ही पारित हो चुका था। असल में, महिला आरक्षण का प्रयास विफल नहीं हुआ है, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने का प्रयास असफल रहा है।
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने संसद के विशेष सत्र के अंतिम दिन कहा, "देश ने कल की बहस देखी। हमने सर्वसम्मति से 2023 का महिला आरक्षण बिल पारित किया था। हम इस बिल के समर्थन में हैं। अब सरकार को 2029 के चुनावों के लिए इसे लागू करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। परिसीमन से जोड़ने का उनका एजेंडा विफल हो गया है, क्योंकि वे अपनी सुविधानुसार परिसीमन करना चाहते थे... इसी कारण से वे अब ये सभी मनगढ़ंत बातें कर रहे हैं। महिला आरक्षण कभी विफल नहीं हुआ।"
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा, "यह ऐतिहासिक विधेयक 2023 में पारित हो चुका था। इसमें संशोधन की आवश्यकता क्यों थी? संशोधन लाने के बावजूद, उन्होंने पुराने विधेयक को ही अधिसूचित कर दिया। इस पर बहस और मतदान का कोई आधार नहीं था। पूरा देश जानता है कि इसे इसलिए लाया गया क्योंकि पश्चिम बंगाल में चुनाव हो रहे हैं। वे यह भूल गए हैं कि ममता बनर्जी पहले ही महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत से अधिक का कोटा लागू कर चुकी हैं।"