महिला आरक्षण बिल: क्या चुनाव से पहले आएगा बड़ा बदलाव?
महिला आरक्षण बिल पर सरकार का इशारा
महिला आरक्षण बिल को लेकर सरकार के राज्यसभा में दिए गए संकेतों ने चुनावों से पहले इसे लाने की संभावनाओं को बढ़ा दिया है। इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, खासकर बजट सत्र के अंतिम दिन।
सरकार ने विशेष सत्र का संकेत दिया
पार्लियामेंट्री अफेयर्स मिनिस्टर किरेन रिजिजू ने बताया कि कुछ बिल पास होने के बाद सदन को स्थगित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार 2-3 हफ्तों में एक विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है, जिसे महिला आरक्षण बिल के संदर्भ में देखा जा रहा है। इस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
विपक्ष ने राजनीतिक समय पर सवाल उठाए
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार चुनावों से पहले राजनीतिक लाभ के लिए इस बिल को लाने की कोशिश कर रही है। सदन के नेता जेपी नड्डा ने कहा कि यह सरकार का अधिकार है कि वह कब संसद बुलाए। वहीं, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश और संसद तानाशाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।
स्पष्टता और ऑल-पार्टी मीटिंग की मांग
कांग्रेस के सांसद जयराम रमेश ने सरकार के स्थगन और पुनः बुलाने के प्लान पर स्पष्टता मांगी। उन्होंने चुनावों के बाद एक ऑल-पार्टी मीटिंग की भी मांग की, यह चेतावनी देते हुए कि इससे पहले बिल पेश करना मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन हो सकता है।
सरकार ने अपने रुख का बचाव किया
किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार 2029 तक लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस बिल का समर्थन करने की अपील की, यह कहते हुए कि यह राजनीति का मुद्दा नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का मामला है।
टाइमिंग पर बहस जारी
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि यदि सरकार इस बिल को लाना चाहती थी, तो इसे पहले लाना चाहिए था। जेपी नड्डा ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार समय तय करने में सक्षम है और नरेंद्र मोदी की नेतृत्व में कई पेंडिंग बिल तेजी से पास हुए हैं।