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महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव का तीखा हमला, बीजेपी की मंशा पर उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल पर बीजेपी सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं बीजेपी की चालाकियों को समझ चुकी हैं और अब जागरूक महिलाएं उन्हें वोट नहीं देंगी। यादव ने इस बिल को बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति का काला दस्तावेज बताया और कहा कि यह केवल कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी की हर कोशिश समाज को बांटने की है। इस बार महिलाएं इनके बहकावे में नहीं आएंगी।
 

अखिलेश यादव का बयान


लखनऊ : समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र की बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिलाएं बीजेपी की चालाकियों को समझ चुकी हैं और यह बीजेपी की नाकामी का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी नए युग की महिलाओं को स्वीकार नहीं कर पा रही है। संसद में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका है, और बीजेपी के नेता एक-दूसरे को डराने का काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव में प्रदेश ने बीजेपी को हराया था, और अब महिलाएं भी इन्हें हराएंगी। यादव ने कहा कि जागरूक महिलाएं बीजेपी को वोट नहीं देंगी और यह सब टीवी सीरियल देखकर काम कर रहे हैं।


अखिलेश यादव ने आगे कहा कि महिला आरक्षण बिल की असफलता बीजेपी की हार है। विपक्ष की एकता ने बीजेपी को धूल चटा दी है। उन्होंने कहा कि तथाकथित महिला आरक्षण बिल असफल रहा है और बीजेपी की मंशा सही नहीं थी। बीजेपी महिला एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही थी और 33 प्रतिशत महिलाओं का हक छीनने का प्रयास कर रही थी। उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बीजेपी जल्दबाजी में संशोधन लाने का प्रयास कर रही है। यह बीजेपी का एक बड़ा षडयंत्र है।




अखिलेश यादव ने कहा कि परिसीमन के नाम पर यह बिल नारी के अधिकारों का हनन करने के लिए लाया गया था। यह केवल बीजेपी की विभाजनकारी राजनीति का काला दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि यह बीजेपी की हार है, क्योंकि उनका हर बिल या तो कुछ लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए होता है या समाज को बांटने का प्रयास होता है।


हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जिस तरह से इसे लाया जा रहा है, उसके खिलाफ हैं। जातीय जनगणना के बाद देश आरक्षण की मांग करेगा, और बीजेपी इससे बचना चाहती है। देश में आरक्षण के साथ-साथ संरक्षण की भी आवश्यकता है। महिला आरक्षण बिल बीजेपी और उनके सहयोगियों का एक नया धोखा है, जो दरअसल पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं को कमजोर करने की साजिश है। यह बिल वर्चस्ववादियों की हार की हताशा का परिणाम है। महिला आरक्षण बिल केवल एक जनविरोधी जुमला है।


जागरूक महिलाएं इस बार बीजेपी के बहकावे में नहीं आएंगी। यह बिल बीजेपी की कुटिल राजनीति का मुखौटा है। जैसे-जैसे बीजेपी का विरोध बढ़ेगा, ऐसे और भी कई बिल आएंगे, जिनका उद्देश्य 'पीडीए' की एकता को कमजोर करना है। बीजेपी अपनी एक्सपायरी डेट के अंतिम महीनों में है।