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महिला आरक्षण बिल पर प्रधानमंत्री मोदी का बयान, विपक्ष पर आरोप

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में असफल हो गया है, जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रात देश को संबोधित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण बिल का समर्थन नहीं किया। मोदी ने चेतावनी दी कि विपक्ष को इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह परिसीमन के जरिए चुनावी नक्शे को बदलने का प्रयास कर रही है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

महिला आरक्षण बिल का असफल होना


नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को असफलता का सामना करना पड़ा है। इसके अस्वीकृत होने के एक दिन बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8.30 बजे देशवासियों को संबोधित करेंगे। सूत्रों के अनुसार, आज की कैबिनेट बैठक में प्रधानमंत्री ने विपक्ष को दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया और इसके खिलाफ काम करने का आरोप भी लगाया।


प्रधानमंत्री मोदी की चेतावनी

पीएम मोदी ने विपक्ष के इस व्यवहार को एक गंभीर गलती करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में उन्हें इसके राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि विपक्ष महिलाओं के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि विपक्षी दल अब अपनी स्थिति को सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।


विपक्ष का सरकार पर आरोप

विपक्ष ने लगाया सरकार पर आरोप: 


कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार परिसीमन के माध्यम से भारत के चुनावी नक्शे को फिर से बनाने का प्रयास कर रही है। महिला आरक्षण के बहाने इसे लागू किया जा रहा है। विपक्ष ने कहा कि जिस तरीके से इस बिल को पेश किया जा रहा है, वह उनके खिलाफ है। इसके साथ ही, उन्होंने मांग की कि सरकार को लोकसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करनी चाहिए।


बिल के लिए आवश्यक वोट

बिल पारित होने के लिए कितने वोटों की थी जरूरत:


महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को निचले सदन में पारित करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी, जो कि दो-तिहाई बहुमत है। सदन में कुल 543 सदस्य हैं। हालांकि, इस विधेयक का समर्थन 298 सदस्यों ने किया, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। विधेयक के अस्वीकृत होने के बाद, सरकार ने परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर मतदान नहीं कराया।