महिला आरक्षण विधेयक गिरने पर लोकसभा में राजनीतिक उथल-पुथल
महिला आरक्षण पर विवाद
लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के गिरने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस चल रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ता विभिन्न स्थानों पर इस मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों पर आरोप लगा रहे हैं। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला किया है, जबकि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
वोटिंग का विवरण
शुक्रवार शाम को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर मतदान हुआ। इस वोटिंग में 528 सदस्यों ने भाग लिया, जिसमें से 298 ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया। इस परिणाम के कारण महिलाओं को संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व देने वाला यह महत्वपूर्ण विधेयक गिर गया, जिससे राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया है। एनडीए सांसद अब विपक्षी सांसदों को घेरने की योजना बना रहे हैं और इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है।
केंद्रीय मंत्री का बयान
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विपक्षी सांसदों को उनके इस निर्णय का जवाब देश की महिलाएं देंगी। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक विधेयक बताया, जिसका उद्देश्य संसद और विधानसभा में महिलाओं को आरक्षण प्रदान करना था। रिजिजू ने कहा कि ऐसे विधेयक का विरोध करना समझ से परे है और इसे देश के लिए काला दिन करार दिया।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक का समर्थन करती है और चाहती है कि इसे तुरंत लागू किया जाए। थरूर ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने इसे परिसीमन के मुद्दे से जोड़कर जटिल बना दिया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन एक अलग विषय है और इस पर गंभीर चर्चा की आवश्यकता है।