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महिलाओं के लिए 33% आरक्षण: केंद्र सरकार का नया बिल

केंद्र सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन करने जा रही है। इस बिल के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें डीएमके और दक्षिण भारत की अन्य पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। जानें इस बिल के पीछे की राजनीति और संभावित समर्थन के बारे में।
 

केंद्र सरकार का नया प्रस्ताव


केंद्र सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन और परिसीमन का एक नया बिल लाने की योजना बना रही है। इस बिल के लिए दो तिहाई समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही है। तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों के टूटने के बाद, सरकार के संसदीय प्रबंधक इसे चुनौतीपूर्ण नहीं मान रहे हैं। हालांकि, सरकार की नजरें डीएमके पर टिकी हुई हैं। यदि डीएमके के 22 लोकसभा सांसद समर्थन देते हैं या सदन से अनुपस्थित रहते हैं, तो सरकार की स्थिति मजबूत हो जाएगी। लेकिन डीएमके का समर्थन मिलने से विपक्ष के लिए परिसीमन को उत्तर बनाम दक्षिण भारत का मुद्दा बनाना कठिन हो जाएगा।


दक्षिण भारत की पार्टियों का समर्थन

दक्षिण भारत की कई राजनीतिक पार्टियां सरकार का समर्थन कर रही हैं। आंध्र प्रदेश में सत्तारूढ़ टीडीपी ने इस बिल का समर्थन किया है, और अन्ना डीएमके से भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। इस बीच, तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की पार्टी बीआरएस भी इस बिल का समर्थन कर सकती है। केटी रामाराव, चंद्रशेखर राव के बेटे, ने एक अंग्रेजी समाचार पत्र को दिए इंटरव्यू में परिसीमन के पक्ष में बात की है। उन्होंने कहा कि देश में चार हजार से अधिक विधायक हैं, और यदि उनकी संख्या बढ़ाकर छह हजार कर दी जाए, तो यह फायदेमंद होगा। हालांकि, उन्होंने सरकार के बिल का समर्थन करने की बात नहीं की। लेकिन यदि वे परिसीमन के जरिए सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ाने को सही मानते हैं, तो इसका मतलब है कि उनकी पार्टी इसका समर्थन कर सकती है। ध्यान रहे कि लोकसभा में उनकी पार्टी का कोई सांसद नहीं है, लेकिन राज्यसभा में उनके चार सांसद हैं।