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मानसून की बारिश में कमी की भविष्यवाणी, मौसम विभाग ने दी नई जानकारी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश में कमी की भविष्यवाणी की है, जिससे देश में चिंता बढ़ गई है। पहले 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान था, जो अब घटकर 78 सेंटीमीटर हो गया है। इसके अलावा, मानसून की एंट्री में भी देरी हो रही है, जो सामान्य से लगभग 10 दिन बाद होगी। जानें इस बदलाव का कृषि और खाद्य उत्पादन पर क्या असर पड़ेगा।
 

मानसून की बारिश में कमी


नई दिल्ली। मौसम विभाग ने मानसून के संबंध में अपनी पूर्वानुमान में बदलाव किया है। अब यह बताया गया है कि पहले के अनुमान से कम बारिश होने की संभावना है, जो देश के लिए चिंता का विषय है। पहले 80 सेंटीमीटर बारिश का अनुमान था, लेकिन अब यह 78 सेंटीमीटर रहने की संभावना जताई गई है। सामान्य बारिश के लिए 87 सेंटीमीटर को मानक माना जाता है, जिससे पहले 92 प्रतिशत बारिश की संभावना थी, जो अब घटकर 90 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, जून और जुलाई में हीटवेव के चलने की भी आशंका है, जिससे तापमान सामान्य से तीन डिग्री अधिक हो सकता है।


मानसून की एंट्री में देरी

मौसम विभाग ने यह भी बताया कि मानसून की एंट्री में और देरी हो गई है। शुक्रवार को जारी जानकारी के अनुसार, श्रीलंका के ऊपर कम दबाव वाली तूफानी हवाओं के कारण मानसून केरल तट से लगभग 35 किलोमीटर दूर अटका हुआ है। यह स्थिति पिछले पांच दिनों से बनी हुई है और अगले दो से तीन दिनों में इसके आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।


केरल के तट पर मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीख एक जून मानी जाती है। पहले मौसम विभाग ने 26 मई तक मानसून के आने का अनुमान लगाया था, लेकिन अब यह अनुमान सात दिन बाद केरल तट पर पहुंचने का है। इस प्रकार, मानसून की एंट्री में लगभग 10 दिन की देरी हो रही है।


कम बारिश का असर

मौसम विभाग ने यह भी बताया कि जून में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। वहीं, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में सामान्य बारिश का अनुमान है। यह भी बताया गया है कि मानसून के कोर जोन में कम बारिश होगी, जो खेती के लिए महत्वपूर्ण है। इस क्षेत्र में फसलों और खाद्य उत्पादन पर कम बारिश का सीधा असर पड़ेगा। मानसून का कोर जोन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र का विदर्भ, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और बिहार के इलाके शामिल हैं।