मानसून पर हीट वेव का असर: आईएमडी की चेतावनी
मानसून की स्थिति पर गंभीर चिंताएं
जल्द बदलाव न होने पर मानसून पर पड़ेगा नकारात्मक प्रभाव
भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि देश की अधिकांश जनसंख्या इनसे जुड़ी हुई है। कृषि के लिए वर्षा अत्यंत आवश्यक है, और भारत में अधिकांश वर्षा मानसून के दौरान होती है। यदि मानसून में वर्षा कम होती है, तो इसका सीधा असर कृषि पर पड़ेगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।
इस बार भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने जो जानकारी दी है, वह चिंताजनक है। आईएमडी के अनुसार, जून से सितंबर 2026 के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की संभावना है। अनुमान है कि इस अवधि में वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 90 प्रतिशत तक रह सकती है, जो सामान्य से कम मानी जाती है। मानसून 26 मई को केरल में दस्तक देने वाला था, लेकिन हीट वेव ने इसे रोक दिया है, और आज 29 मई को भी यह भारत में नहीं पहुंचा है।
वर्षा का क्षेत्रवार अनुमान
क्षेत्रवार अनुमान के अनुसार, उत्तर-पूर्व भारत में सामान्य वर्षा की संभावना है, जबकि मध्य, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। जून 2026 के लिए जारी मासिक पूवार्नुमान में कहा गया है कि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर, अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा सामान्य स्तर के 92 प्रतिशत से कम रहने की संभावना है।
तापमान में वृद्धि की संभावना
मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि जून में देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और तेलंगाना में हीटवेव के दिनों की संख्या बढ़ने की संभावना है। हालांकि, राजस्थान और झारखंड में हीटवेव की स्थिति कम रहने का अनुमान है। पंजाब, हरियाणा और दिल्ली एनसीआर में भी यह मानसून की गतिविधियों पर निर्भर करेगा। यदि मानसून अच्छी बारिश करता है, तो गर्मी कम होगी, लेकिन यदि वर्षा सामान्य से कम होती है, तो गर्मी और उमस बढ़ सकती है।