मायावती ने आरक्षण पर उठाए गंभीर सवाल, क्रीमी लेयर को बताया अनुचित
आरक्षण का सामाजिक महत्व
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन, सम्मान और समानता से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने एससी-एसटी वर्ग को आरक्षण में क्रीमी लेयर की अवधारणा को अनुचित करार दिया।
मायावती ने एक बयान में कहा कि एससी-एसटी समुदाय ने सदियों से जातिगत भेदभाव और शोषण का सामना किया है, इसलिए उनके लिए आरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि जातिगत भेदभाव और अत्याचार आज भी समाप्त नहीं हुए हैं, इसलिए आरक्षण को केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान पर भी मायावती ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने आरक्षण के राजनीतिकरण से समाज में कड़वाहट पैदा होने की बात कही थी। मायावती ने इसे जातिवादी सोच का परिचायक बताया।
1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व…
— Mayawati (@Mayawati) August 9, 2026
उन्होंने कहा कि आरक्षण का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को समानता और सम्मान का अवसर प्रदान करना है, जो सदियों से सामाजिक भेदभाव का शिकार रहे हैं। इसे केवल आर्थिक उन्नति के पैमाने पर नहीं आंका जा सकता, क्योंकि जातिगत भेदभाव का प्रभाव आज भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में दिखाई देता है।
सरकार से प्रभावी पैरवी की मांग
मायावती ने कहा कि केंद्र की विभिन्न सरकारें इस सामाजिक वास्तविकता से अवगत हैं। उन्होंने आशा जताई कि यदि सरकार के पास एससी-एसटी समुदाय को क्रीमी लेयर से बाहर रखने के लिए ठोस संवैधानिक और कानूनी तर्क हैं, तो वह अदालत में प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार सरकारों की कमजोर कानूनी पैरवी के कारण सामाजिक परिवर्तन और समानता से जुड़े मामलों में अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाते हैं।
आरक्षण मुद्दे पर राजनीति न करे आरएसएस
बसपा प्रमुख ने आरएसएस से अपील की कि वह आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति न करे और इसमें किसी भी प्रकार के बदलाव की वकालत से बचे। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का सम्मान करते हुए देश में समतामूलक समाज व्यवस्था स्थापित करने के संवैधानिक उद्देश्यों की पूर्ति में सहयोग किया जाना चाहिए।