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मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: ईरान का जॉर्डन पर हमला

मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां ईरान ने जॉर्डन पर हमला किया है। ईरान के पास 15,000 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो अमेरिका और इसराइल को सीधे निशाना बना सकती हैं। जॉर्डन, जो अमेरिका का करीबी सहयोगी है, अब ईरान के हमलों का सामना कर रहा है। जानें इस जटिल स्थिति के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम।
 

मिडिल ईस्ट में संभावित युद्ध की आशंका

वेस्ट एशिया, जिसे मिडिल ईस्ट के नाम से जाना जाता है, में एक क्षेत्रीय युद्ध की संभावना बढ़ रही है। हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास 15,000 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं। ये मिसाइलें किसी भी महाद्वीप पर सटीकता से हमला कर सकती हैं, जिससे ईरान अमेरिका को भी निशाना बना सकता है। ईरान ने पहले ही इसराइल पर हमले शुरू कर दिए हैं और अब जॉर्डन को भी अपने निशाने पर ले लिया है। जॉर्डन, जो अमेरिका और इसराइल का करीबी सहयोगी है, का बॉर्डर इसराइल से जुड़ा हुआ है। यहाँ अमेरिकी बल और रक्षा प्रणाली तैनात हैं, जिससे जॉर्डन को सुरक्षा का कवच माना जाता है। ईरान द्वारा इसराइल की ओर दागी गई मिसाइलें अक्सर जॉर्डन में इंटरसेप्ट की जाती हैं।  


ईरान का जॉर्डन पर हमला

ईरान ने जॉर्डन पर जो हमला किया है, उसमें उसने अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम 'थर्ड' को नष्ट कर दिया है, जो कि एक महंगा रक्षा प्रणाली है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने जॉर्डन को निशाना इसलिए बनाया क्योंकि वहाँ अमेरिका के 12 सैन्य ठिकाने हैं। जॉर्डन अमेरिकी सेंट्रल कमांड का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जिसमें नेवल और एयरबेस शामिल हैं। ईरान ने जॉर्डन में अमेरिका की सभी ताकत को अपनी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में ले लिया है। अमेरिका जॉर्डन में अपनी और इसराइल की सुरक्षा के लिए मौजूद है, लेकिन वह इसे जॉर्डन की सुरक्षा के लिए एक एहसान के रूप में पेश करता है। जॉर्डन के पास तेल के भंडार नहीं हैं, जिससे वह अपनी जरूरतों के लिए अमेरिका और इसराइल पर निर्भर है। विशेषज्ञों का कहना है कि जॉर्डन एक डबल गेम खेलता है, एक तरफ वह फिलिस्तीन के समर्थन में है। 


जॉर्डन की स्थिति और ईरान का खतरा

जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह सेकंड खुद को पैगंबर मोहम्मद के वंशज मानते हैं और यरूशलम में मस्जिद अल अक्सा के देखरेखकर्ता हैं। ईरान ने हाल ही में जॉर्डन, बहरीन, कुवैत और क़तर को भी अपने निशाने पर लिया है। किंग अब्दुल्लाह, जो पैगंबर के खानदान से हैं, खुलकर ईरान के खिलाफ इसराइल का समर्थन करते हैं। जॉर्डन ने अब्राहम अकॉर्ड के तहत इसराइल को मान्यता दी है, लेकिन गाजा पर इसराइल की आक्रामकता के समय जॉर्डन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं आई। किंग अब्दुल्लाह पैगंबर मोहम्मद के वंशजों में 41वीं पीढ़ी के हैं और अल अक्सा मस्जिद के संरक्षक हैं, जिसकी सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी उनकी है।