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मीनाक्षी नटराजन के नामांकन में धोखा: सिस्टम और अपने लोगों से मिली ठगी

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को उनके नामांकन में दोहरी ठगी का सामना करना पड़ा है। एक ओर, सिस्टम ने तकनीकी कमी के कारण उनका नामांकन खारिज कर दिया, जबकि दूसरी ओर, उनके अपने पार्टी के लोगों ने भाजपा को उनके खिलाफ कानूनी नोटिस की जानकारी दी। इस स्थिति ने मीनाक्षी के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं, खासकर जब राहुल गांधी ने उन्हें टिकट दिया था। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक निहितार्थ।
 

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन विवाद


कांग्रेस की पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को दोहरी ठगी का सामना करना पड़ा है। पहले, उनके नामांकन पत्र में एक तकनीकी कमी के कारण इसे खारिज कर दिया गया। मीनाक्षी और उनकी टीम का कहना है कि उनके खिलाफ कोई लंबित मामला नहीं है और केवल एक नोटिस प्राप्त हुआ था, जो नामांकन में उल्लेख करने की आवश्यकता नहीं थी। इस स्थिति को धोखा माना जा सकता है, क्योंकि झारखंड में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन में तीन गलतियां थीं, फिर भी उनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया।


दूसरी ओर, मीनाक्षी नटराजन के साथ एक और धोखा उनके अपने पार्टी के लोगों द्वारा किया गया है। यह आरोप है कि कांग्रेस के किसी नेता ने भाजपा और राज्य सरकार को उनके खिलाफ कानूनी नोटिस की जानकारी दी। इस जानकारी के बाद भाजपा ने अपने तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा। पहले, भाजपा ने केवल दो उम्मीदवारों की घोषणा की थी, लेकिन नामांकन के अंतिम दिन मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने करीबी महेश केवट को उम्मीदवार बना दिया। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री को पहले से ही मीनाक्षी के खिलाफ मामले की जानकारी थी। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब राहुल गांधी ने मीनाक्षी को टिकट दिया, जबकि पार्टी के बड़े नेताओं ने मिलकर उनका नामांकन रद्द करवा दिया।