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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया, अभिभावकों को दी प्रेरणा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों का सम्मान किया। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में पिछले नौ वर्षों में आए बदलावों का उल्लेख किया। समारोह में 200 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें छात्राओं की संख्या अधिक थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है और छात्रों को भी छात्राओं से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य और परीक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
 

मुख्यमंत्री का सम्मान समारोह

उत्तर प्रदेश: माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावियों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने पिछले नौ वर्षों में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों और उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए छात्रों को भविष्य के लिए प्रेरित किया।


मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं, जहां जिला स्तर पर उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने सभी सफल छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि लखनऊ में आयोजित समारोह में 200 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया, जिनमें से कई को उन्होंने स्वयं सम्मानित किया।


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— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) June 1, 2026



मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में सम्मानित किए गए 223 विद्यार्थियों में 85 छात्र और 138 छात्राएं शामिल हैं। इसी प्रकार, हाईस्कूल की मेरिट सूची में 115 विद्यार्थियों में 34 छात्र और 81 छात्राएं हैं। इंटरमीडिएट की टॉप सूची में भी 9 छात्र और 14 छात्राएं शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े दर्शाते हैं कि छात्राएं अधिक मेहनत कर रही हैं और बेहतर अंक प्राप्त करने की क्षमता रखती हैं।


मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि पहले माना जाता था कि छात्राएं घर के कामों में अपनी माताओं का हाथ बंटाती हैं, लेकिन अब समय बदल गया है। उन्होंने कहा कि छात्र घरों में झाड़ू-पोछा अधिक करने लगे हैं या माता-पिता उनसे ज्यादा काम ले रहे हैं, शायद इसी कारण छात्रों के अंक कम आए हैं और छात्राओं ने मेरिट सूची में बेहतर स्थान प्राप्त किया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक सकारात्मक संकेत है और छात्रों के लिए प्रेरणा का विषय भी है। जब छात्राएं परिवार की जिम्मेदारियों के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं, तो छात्रों को भी उनका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटी पढ़ेगी, तो आगे बढ़ेगी और देश तथा समाज को भी आगे बढ़ाएगी। यह संदेश इस परीक्षा परिणाम के माध्यम से स्पष्ट रूप से सामने आया है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नौ वर्ष पहले प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति अलग थी। परीक्षा में नकल होना आम बात मानी जाती थी। विद्यालयों में शिक्षकों की कमी थी और अभिभावकों तथा विद्यार्थियों में भी पढ़ाई के प्रति गंभीरता का अभाव था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में ऐसे मामले सामने आते थे, जहां दूसरे राज्यों के छात्र उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में परीक्षा देने पहुंचते थे और वास्तविक परीक्षार्थी की जगह कोई और परीक्षा देता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब परीक्षा वही छात्र देता है जिसका नाम पंजीकृत है। विद्यालयों में शिक्षक मौजूद हैं और वही पढ़ा रहे हैं। यदि कोई शिक्षक शासन से मानदेय प्राप्त कर रहा है तो उसी को शिक्षण कार्य करना होगा, उसके स्थान पर कोई प्रॉक्सी शिक्षक नहीं पढ़ाएगा। सरकार ने ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को परेशान करना नहीं होना चाहिए। परीक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास का निर्माण करे और उन्हें सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने का कार्य करे.

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र विद्यार्थियों का पसीना निकालने या उन्हें भयभीत करने के लिए नहीं बनाए जाने चाहिए। एक अच्छा परीक्षक वह नहीं है, जो अत्यंत जटिल प्रश्न पूछकर छात्रों को परेशान करे। कई बार ऐसे प्रश्न बनाने वाले स्वयं भी उनके उत्तर से पूरी तरह परिचित नहीं होते। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय परंपरा में शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं बल्कि जीवन की चुनौतियों से मुकाबला करने की क्षमता विकसित करना है.

उन्होंने संस्कृत वाक्य “सा विद्या या विमुक्तये” का उल्लेख करते हुए कहा कि वही विद्या श्रेष्ठ है जो जीवन में हर प्रकार की मुक्ति और आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करे। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ने कभी पलायनवाद का समर्थन नहीं किया। भगवान राम का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राम को आदर्श पुरुष बनाने में गुरु वशिष्ठ, गुरु विश्वामित्र और महर्षि वाल्मीकि की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

इसी प्रकार महर्षि अगस्त्य ने उत्तर से दक्षिण तक भारत की एकता को मज़बूत करने में योगदान दिया.

मुख्यमंत्री ने भगवान कृष्ण का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु संदीपनि के मार्गदर्शन ने कृष्ण को केवल मुरलीधर से धर्म स्थापना के लिए सुदर्शन धारण करने वाला योद्धा बनाया। समय और परिस्थितियों के अनुसार भूमिका बदलती है, लेकिन सही मार्गदर्शन ही व्यक्ति को अपने उद्देश्य तक पहुंचाता है.

उन्होंने कहा कि युग भले बदल जाएं, लेकिन गुरु, शिक्षा और संस्कारों का महत्व कभी कम नहीं होता। यही तत्व व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला हैं.