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मुख्यमंत्री योगी ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती का 7वां राष्ट्रीय अधिवेशन शुरू किया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया। उन्होंने विज्ञान के महत्व, कृषि के नवाचार और एमएसएमई क्षेत्र की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। योगी ने भारत की प्राचीन परंपराओं और आधुनिक विज्ञान के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अधिवेशन का उद्देश्य भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करना और 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करना है। जानें इस अधिवेशन में और क्या चर्चा हुई।
 

मुख्यमंत्री का उद्घाटन सत्र

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन सत्र में कहा कि मदन मोहन मालवीय जी के प्रयासों से यह विश्वविद्यालय ज्ञान का केंद्र बन गया है। उन्होंने विज्ञान भारती द्वारा आयोजित कार्यक्रमों के लिए सभी को बधाई दी।


मुख्यमंत्री ने बताया कि विज्ञान का अर्थ लोक कल्याण है। उन्होंने कहा कि जिन देशों ने प्रगति की है, उनके पास विज्ञान का यही दृष्टिकोण था। आधुनिक विज्ञान का इतिहास चार से पांच सौ साल पुराना है। यदि हम भारत की प्राचीन गौरवमयी परंपरा का अध्ययन करें, तो यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44 से 45 प्रतिशत थी। स्वतंत्रता के समय यह घटकर 1.5 से 2 प्रतिशत रह गई। हमें यह समझना होगा कि ऐसा क्यों हुआ। पहले किसान केवल किसान नहीं थे, वे नवाचारक भी थे।


उन्होंने कहा कि कृषि कभी घाटे का सौदा नहीं था। उस समय के किसान स्वयं नवाचार करते थे। व्यापारी केवल व्यापारी नहीं थे, वे देश को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम थे। भारत एक कृषि प्रधान देश है, और हमारी सबसे बड़ी ताकत एमएसएमई और कृषि क्षेत्र में है।


मुख्यमंत्री ने जगदीश चंद्र बसु द्वारा पौधे लगाने की कहानी साझा की और कहा कि जीवों में भी चेतना होती है। उन्होंने अपने बचपन में पौधे लगाने का जिक्र किया। ज्ञान का स्वागत होना चाहिए, चाहे वह कहीं से भी आए। उन्होंने भारत की परंपरा को धिक्कारा जाने का उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप भारत सभी सुविधाओं से लैस हो गया। उन्होंने मां गंगा के प्रति भारत की प्राचीन आस्था का भी उल्लेख किया।


मुख्यमंत्री ने ऑर्गेनिक खेती और जीरो बजट खेती की बात करते हुए रसायनों के अनावश्यक उपयोग से होने वाले नुकसान की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले कारीगरों को बदहाल किया गया, जिसके कारण उनके उत्पाद बाजार से बाहर हो गए।


2017 के बाद, हमने एक जिला एक उत्पाद योजना शुरू की, जिससे डिजाइन और पैकेजिंग को बढ़ावा मिला। आज हमारा निर्यात दो लाख करोड़ को पार कर गया है, जिसका मुख्य कारण हमारा एमएसएमई सेक्टर है।


हमने एमएसएमई सेक्टर को खुली छूट दी, जिसके परिणामस्वरूप 96 लाख यूनिटों में तीन करोड़ लोग कार्यरत हैं। आज हमारा रोजगार दर 3 प्रतिशत से नीचे आ चुका है। अनुसंधान और नवाचार में सभी को शामिल करने की आवश्यकता है। उन्होंने जीवक के तक्षशिला विश्वविद्यालय में आयुर्वेद अध्ययन को भी रेखांकित किया।


विज्ञान भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो शेखर पांडेय ने सभी का स्वागत करते हुए बताया कि विज्ञान भारती की स्थापना 1991 में विज्ञान की उपलब्धियों को समाज के सामने लाने के लिए की गई थी।


इससे पहले, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान में बुजुर्गों के स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान हेतु लगभग 150 करोड़ की लागत से बन रहे 200 बिस्तरों वाले 'नेशनल सेंटर फॉर एजिंग' का निरीक्षण किया।


उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं को निर्देशित किया कि कार्य को प्राथमिकता पर समय पर पूरा किया जाए। निर्माण कार्य में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए बीएचयू प्रशासन के अधिकारियों को भी निगरानी रखने के लिए कहा।


विज्ञान भारती के 7वें राष्ट्रीय अधिवेशन के क्षेत्र संगठन मंत्री अंकित राय ने बताया कि यह अधिवेशन संवाद, सहयोग और नीति-निर्माण के लिए एक प्रभावी मंच बनेगा, जो भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।