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मुरादाबाद में आजम खान की बेटी की राजनीतिक एंट्री से हलचल

मुरादाबाद की राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है, जब समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान की मुंह बोली बेटी एकता कौशिक ने विधानसभा चुनाव में अपनी एंट्री की। 14 अप्रैल को आयोजित डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। क्या समाजवादी पार्टी इस बार किसी हिंदू चेहरे को मैदान में उतारेगी? जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में।
 

मुरादाबाद की सियासत में नया मोड़


मुरादाबाद:- आगामी विधानसभा चुनावों में मुरादाबाद की राजनीति में समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान का प्रभाव फिर से देखने को मिल रहा है। उनकी मुंह बोली बेटी, एकता कौशिक, नगर विधानसभा 28 से चुनाव लड़ने के संकेत दे रही हैं। 14 अप्रैल को मुरादाबाद में डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में एकता कौशिक की उपस्थिति को विधानसभा 2027 चुनाव से जोड़ा जा रहा है। उनके इस कार्यक्रम में शामिल होने से नगर विधानसभा सीट पर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। यह संभावना जताई जा रही है कि समाजवादी पार्टी इस बार किसी हिंदू चेहरे को मैदान में उतार सकती है, और एकता कौशिक की एंट्री इस दिशा में एक संकेत है।



आजम खान का मुरादाबाद की राजनीति में प्रभाव:


पिछले दो विधानसभा चुनावों में नगर विधानसभा 28 पर समाजवादी पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। विधानसभा 2027 में पार्टी इस सीट को किसी भी कीमत पर हारना नहीं चाहती। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, यह चर्चा तेज हो गई है कि समाजवादी पार्टी किस प्रत्याशी को उतारेगी। क्या वे फिर से किसी मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाएंगे या हिंदू चेहरे को? इस बार चर्चा है कि पार्टी हिंदू चेहरे पर दांव लगाने जा रही है, और एकता कौशिक की एंट्री इस बात को और मजबूत करती है। आजम खान भले ही जेल में हों, लेकिन मुरादाबाद की राजनीति में उनका प्रभाव हमेशा बना रहता है। यह प्रभाव 2024 के लोकसभा चुनाव में भी देखा गया था, जब पूर्व सांसद एसटी हसन का टिकट काटकर रुचि वीरा को प्रत्याशी बनाया गया था। एकता कौशिक का मुरादाबाद के कार्यक्रम में शामिल होना दर्शाता है कि वह अब लगातार मुरादाबाद में लोगों के बीच रहना चाहती हैं, ताकि वह अधिक से अधिक लोगों से मिल सकें और नगर विधानसभा सीट के समीकरण को समझ सकें। आजम खान की मुंह बोली बेटी होना एकता कौशिक के लिए उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत मानी जा रही है। अचानक उनकी एंट्री से मुरादाबाद के राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।