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मुस्लिम नाटो: तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान का नया रक्षा समझौता

तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने मक्का में एक नया रक्षा समझौता किया है, जिसे मुस्लिम नाटो कहा जा रहा है। इस समझौते के तहत, यदि इनमें से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे सभी पर हमला माना जाएगा। भारत ने इस पर अपनी नजर बनाए रखी है। जानें इस समझौते के पीछे के उद्देश्य और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

नई सुरक्षा पहल का आगाज़


नई दिल्ली। अमेरिका और यूरोपीय देशों के रक्षा संगठन नाटो की तर्ज पर, तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने एक नया संगठन स्थापित किया है, जिसे मुस्लिम नाटो के नाम से जाना जा रहा है। इस संगठन के तहत, तीनों देशों ने मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के अनुसार, यदि इनमें से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे सभी तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। भारत ने इस समझौते पर अपनी नजर बनाए रखी है।


समझौते की औपचारिकता

इस समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोआन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। यह समारोह मक्का के अल सफा पैलेस में आयोजित किया गया था। इस समझौते को 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' का नाम दिया गया है। तीनों देशों ने एक साझा बयान में कहा कि यह समझौता उनके ऐतिहासिक संबंधों, इस्लामी एकता, साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग पर आधारित है।


सुरक्षा और स्थिरता का लक्ष्य

साझा बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि इस समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना और क्षेत्रीय तथा वैश्विक स्तर पर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही, यह भी कहा गया कि समझौते का मुख्य लक्ष्य बाहरी आक्रमणों के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाना है। भारत ने इस रक्षा समझौते पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह इस पर बारीकी से नजर रखे हुए है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'यह समझौता एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर हम ध्यान दे रहे हैं और आपको इसके बारे में समय-समय पर जानकारी देते रहेंगे।'