मोदी और ट्रंप के बीच विवाद: भारत की चुप्पी पर सवाल
ट्रंप के बयान पर भारत की चुप्पी
डॉनल्ड ट्रंप ने हाल ही में मोदी की उनसे मिलने की कथित उत्सुकता का जिक्र किया और अपाची हेलीकॉप्टरों के सौदे पर गलत जानकारी दी, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है। इसके बावजूद, भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई!
ट्रंप अक्सर अपनी बातों में अतिशयोक्ति करते हैं। वे अपनी प्रशंसा में तो लिप्त रहते हैं, लेकिन दूसरों का अपमान करने से भी नहीं चूकते। इस दौरान वे सच और झूठ की परवाह नहीं करते। अपने दूसरे कार्यकाल में उन्होंने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी निशाना बनाया है। भारत के संदर्भ में यह केवल शब्दों की लड़ाई नहीं है। उन्होंने भारतीय वस्तुओं पर उच्चतम आयात शुल्क लगाकर अमेरिका के व्यापार को नुकसान पहुंचाया है। इसके अलावा, एच-1बी वीजा और छात्र वीजा के मामलों में उनके प्रशासन ने भारत के प्रति कठोर रुख अपनाया है।
यह आश्चर्यजनक है कि मोदी सरकार, जो अपनी प्रतिष्ठा को लेकर संवेदनशील है, ट्रंप के हमलों पर चुप्पी साधे हुए है। लेकिन अब स्थिति गंभीर हो चुकी है। ट्रंप के हालिया बयान में मोदी की उनसे मिलने की कथित बेसब्री और हेलीकॉप्टर सौदे पर गलतबयानी को पूरी तरह से अस्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने 68 हेलीकॉप्टरों का जिक्र किया, जबकि भारत ने केवल 28 हेलीकॉप्टर खरीदने का सौदा किया है, और ट्रंप का इस डिलीवरी में कोई योगदान नहीं है। फिर भी, भारत सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई!
यदि इस चुप्पी का उद्देश्य ट्रंप को खुश करना और भारत के लिए अनुकूल व्यापार समझौता हासिल करना है, तो ऐसा कोई संकेत निकट भविष्य में नहीं दिखता। इसलिए अब चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है। नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच कितनी गहरी व्यक्तिगत दोस्ती है, यह देशवासियों के लिए ज्ञात नहीं है। लेकिन मोदी भारत के प्रधानमंत्री हैं और वे देश की संप्रभुता का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में विदेशी नेताओं द्वारा उनका अपमान भारत का अपमान बन जाता है। हर भारतीय को इससे फर्क पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक है कि मोदी सरकार ट्रंप को उचित जवाब दे।