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मोदी सरकार के 25 साल: काम की उपलब्धियों पर सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के कार्यकाल पर चर्चा करते हुए, यह लेख उनकी उपलब्धियों और चुनौतियों का विश्लेषण करता है। क्या वास्तव में मोदी ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है? क्या देश में बिजली, सड़क और पानी की समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं? इस लेख में इन सवालों का उत्तर खोजा गया है।
 

प्रधानमंत्री मोदी का कार्यकाल


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में कई उपलब्धियों का दावा किया है। पिछले हफ्ते, केंद्र और राज्य सरकारों ने बड़े पैमाने पर विज्ञापनों के माध्यम से अपने कार्यों की सूची साझा की। कई प्रमुख हस्तियों ने लेख लिखकर मोदी सरकार की उपलब्धियों का बखान किया है। नेताओं का कहना है कि मोदी पिछले 25 वर्षों से हर दिन 18 घंटे काम कर रहे हैं, बिना किसी छुट्टी के। इस साल 7 अक्टूबर को, वे सार्वजनिक सेवा में 25 साल पूरे करेंगे, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था।


बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मोदी के कार्यों की सराहना की है, लेकिन उनके बीच कुछ विवाद भी रहे हैं। जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने नीतीश के साथ एक तस्वीर साझा की थी, जबकि नीतीश ने भाजपा नेताओं के भोज को रद्द कर दिया था। कोशी की बाढ़ के दौरान, मोदी ने बिहार को सहायता राशि भेजी थी, जिसे नीतीश ने लौटा दिया था।


हालांकि, यह सवाल उठता है कि अगर कोई नेता 25 साल तक 18 घंटे काम करता है, तो उसके बाद क्या बचता है? भाजपा और उसके सहयोगियों का कहना है कि मोदी को यह सब करना पड़ा क्योंकि पूर्व की सरकारों ने कुछ नहीं किया। उनका दावा है कि मोदी ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है, जबकि 81 करोड़ लोग अब भी पांच किलो अनाज के लिए निर्भर हैं। यह सोचने वाली बात है कि 106 करोड़ लोग गरीबी में कैसे रह गए।


अटल बिहारी वाजपेयी के समय में, विकास की राजनीति में बिजली, सड़क और पानी का महत्व बढ़ा था। आज भी, देश में यही मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, दिल्ली के आसपास के क्षेत्रों में बिजली की कटौती और पानी की कमी की समस्याएं बनी हुई हैं। सरकार का दावा है कि सभी गांवों में बिजली पहुंचा दी गई है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।