×

मोदी सरकार के प्रयासों से नक्सलवाद पर काबू पाने की दिशा में भारत: अनुराग ठाकुर

अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ मोदी सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने इस समस्या को हल्के में लिया और इसे बढ़ने दिया। ठाकुर ने कहा कि आज भारत नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है, और मोदी सरकार की नीतियों के कारण 'रेड कॉरिडोर' अब केवल 11 जिलों तक सीमित रह गया है। यह न केवल मोदी सरकार की सफलता है, बल्कि उन सुरक्षाकर्मियों की शहादत का भी सम्मान है जो इस लड़ाई में शहीद हुए।
 

नक्सलवाद के खिलाफ मोदी सरकार की नीतियाँ

नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने आज लोकसभा में नक्सलवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस समस्या को हमेशा हल्के में लिया और इसे बढ़ने दिया, जबकि मोदी सरकार के प्रयासों के कारण भारत अब नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है।


अनुराग ठाकुर ने कहा, "कांग्रेस ने नक्सलवाद के रूप में भारत को एक गंभीर घाव दिया। उनके शासन में कई क्षेत्र 'नो-गो ज़ोन' बन गए थे। बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर जैसे जिलों में तिरंगा लहराना खतरनाक हो गया था। स्कूलों में बम धमाके होते थे और सड़कों पर IED बिछाए जाते थे। 2006 से 2011 के बीच नक्सलियों ने 260 स्कूलों को नष्ट किया। 2009 से 2012 के बीच रेलवे, बिजली ग्रिड और टेलीफोन केंद्रों पर 1,183 हमले हुए। यह विकास की हत्या थी, और कांग्रेस मूकदर्शक बनी रही।"


उन्होंने आगे कहा, "2014 में जब मोदी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद से न बातचीत होगी और न ही समझौता। जो हथियार रखेगा, उसे पुनर्वास मिलेगा, और जो नहीं रखेगा, उसे सुरक्षा बलों का सामना करना पड़ेगा। यह नीतिगत स्पष्टता दशकों बाद आई थी। आज भारत इस कैंसर को जड़ से उखाड़ने के कगार पर खड़ा है।"


अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उनके नेताओं ने नक्सलवाद को हमेशा स्थानीय समस्या बताकर अपनी जिम्मेदारी से भागते रहे। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को आंतरिक सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती बताया, लेकिन उनके कार्यकाल में 17,000 से अधिक घटनाएँ हुईं। यह असफलता का स्वीकार था।


उन्होंने कहा, "1967 में नक्सलबाड़ी से शुरू हुई यह आग अब बुझ रही है। जो 'रेड कॉरिडोर' कभी 126 जिलों तक फैला था, वह अब केवल 11 जिलों तक रह गया है। यह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जीत है और उन सुरक्षाकर्मियों की शहादत का सम्मान है जो कांग्रेस की नीतियों के कारण शहीद हुए।"