मोहन भागवत का विदेशी साजिश पर बयान: क्या है असली मुद्दा?
मोहन भागवत का बयान और उसके निहितार्थ
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में विदेशी साजिशों का जिक्र करते हुए सरकार का बचाव किया है, जो संघ परिवार की छवि को धूमिल कर रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी दबावों के चलते स्वदेशी और आत्मनिर्भरता की बातें खोखली हो गई हैं। भागवत ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने संघ और उनके विचारों को कमजोर किया है।
युवाओं के आंदोलन के संदर्भ में भागवत का भाषण उस पुरानी सोच को दोहराता है, जिसमें कांग्रेस ने भी अपने विरोधियों को विदेशी एजेंट करार दिया था। यह विचारधारा अब भी जीवित है, जिससे यह सवाल उठता है कि आज के युवा को कॉकरोच कहने का क्या मतलब है?
किसने आदेश दिया कि कॉकरोचों पर पैलेट गन के छर्रे छोड़े जाएं? चुनावी धांधलियों में किसका हाथ है? क्या यह सब विदेशी साजिश का हिस्सा है? भागवत के भाषण में यह स्पष्ट नहीं है।
मोहन भागवत ने विजयादशमी पर चेतावनी दी कि कुछ शक्तियाँ भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रही हैं। लेकिन क्या प्रधानमंत्री मोदी ने इन शक्तियों के साथ संबंध नहीं बनाए हैं? अमेरिका के विदेश मंत्री का हालिया दौरा इस बात का प्रमाण है।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि विरोधियों को विदेशी एजेंट बताना अब पुराना हो चुका है। अन्नामलाई ने याद दिलाया कि जब नरेंद्र मोदी ने मनमोहन सरकार के खिलाफ आंदोलन किया था, तब उन्हें विदेशी ताकतों का मोहरा नहीं कहा गया था।
भागवत और मोदी की सोच में कोई अंतर नहीं है। कांग्रेस ने भी अपने समय में विरोधियों को विदेशी साजिश का हिस्सा बताया। इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान इसी तरह की राजनीति की थी।
क्या आज भी वही स्थिति है? क्या मोदी सरकार अपने विरोधियों को दबाने के लिए विदेशी साजिश का सहारा ले रही है? यह सवाल आज भी प्रासंगिक है।